बिजली के निजीकरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसे लेकर विद्युतकर्मियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इस दौरान उपकेंद्रों में पुलिस और प्रशासन की टीम लगाकर निजी लाइनमैनों से विद्युत व्यवस्था बहाल रखने का दावा किया गया। इसके बाद भी जिले के ज्यादातर गांव व नगरीय इलाके में विद्युत व्यवस्था धड़ाम रही।
जिला मुख्यालय मंझनपुर में संघर्ष मोर्चा के संयोजक मुरलीधर की अगुवाई में जुटे बिजलीकर्मियों ने कार्य बहिष्कार किया। मुरलीधर का कहना था कि निजीकरण होने से न सिर्फ बिजली विभाग में कार्यरत लोगों को नुकसान होगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। संगठन महीने भर से लगातार निजीकरण का विरोध कर रहा है।
इसके बाद भी संगठन की मांग को अनसुना किया जा रहा है। इसे लेकर बिजली विभाग के कर्मचारी सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इस दौरान जेई विनम्र पटेल, एक्सईएन अंकित कुमार, धीरज यादव, राकेश कुमार, उमेश सिंह, चंद्रिका मौर्या, गौरव श्रीवास्तव, संदीप मिश्रा, राघवेंद्र सिंह आदि तमाम बिजली कर्मी मौजूद रहे।
हालांकि, प्रशासन की तरफ से जिले में बिजली आपूर्ति पहले की तरह ही बहाल रखने का दावा किया गया। हर उपकेंद्र में प्रशासन व पुलिस का नुमाइंदा बैठाया गया था। यह लोग निजी लाइनमैन अथवा आउटसोर्सिंग के कर्मियों के सहारे आपूर्ति बहाल रखने का भरसक प्रयास करते रहे।
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बिजलीकर्मियों की हड़ताल के कारण जिला मुख्यालय में आपूर्ति चरमरा गई। खासकर जिला अस्पताल में आपूर्ति बाधित होने के कारण वहां मरीजों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मामला संज्ञान में आने पर खुद जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह ने पहल की तो दोपहर 12 बजे के बाद यहां का फीडर चालू किया जा सका। बता दें, जिला अस्पताल में ही कोविड-19 का एल-2 श्रेणी का अस्पताल संचालित है। इस वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।