आलू की खेती ने किसानों व कोल्ड स्टोर मालिकों की अबकी कमर तोड़ दी है। आलू की खेती में अब तक लगभग पांच सौ करोड़ रुपये नुकसान हो चुका है। नुकसान का अनुमान कुल पैदावार के तिहाई हिस्से का कारोबारियों ने लगाया है। कोल्ड स्टोर में एक कुंतल आलू जमा करने की फीस 220 रुपये है, जबकि एक कुंतल आलू की मार्केट में कीमत 300 रुपये है। ढाई लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार इस बार कौशाम्बी में हुई है। अब तक दस फीसदी ही आलू जमा हुुआ है। लागत व मुनाफा न मिलने पर किसानों ने आलू को बागों में जमा कर तकवारी शुरू कर दी है। इससे स्टोर मालिकों के साथ ही किसानों में निराशा है। आलू की खेती के चक्कर में कई किसान कर्जदार हो गए हैं। कर्ज लेने वालों का बुरा हाल है।
जिले में इस बार आलू की भरपूर पैदावार हुई है। सरकारी आंकड़ों पर जाएं तो जिले में ढाई लाख मीट्रिक टन आलू किसानों के खेतों में पैदा हुआ है। भारी मात्रा में आलू की पैदावार देख किसानों को अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी। नोटबंदी से किसानों की बढ़ी परेशानी अभी तक दूर नहीं हुई। नोटबंदी के बाद से आलू के दाम में लगातार गिरावट आ रही है। तीन दिन पहले तक आलू की कीमत चार सौ रुपये प्रति कुंतल थी। शनिवार को आलू की कीमत तीन सौ रुपये पर आकर ठहर गई। आलू का भाव इतना नीचे आने से किसानों की हालत खस्ताहाल हो गई। पिछले साल इस सीजन में किसानों ने अपना आलू पांच सौ रुपये कुंतल की दर से खेत से बेचा था।
जिले का साठ फीसदी आलू खुले मार्केट व गैर जनपदों में बिक जाता है। 40 फीसदी आलू स्टोर में जमा होता है। जिले में कुल सात आलू स्टोर हैं। इनकी क्षमता सवा लाख मीट्रिक टन है। स्टोर मालिकों का मानना है कि 40 फीसदी कच्चे माल के रूप में उनको आलू मिल जाता था। आलू का दाम गिरने से उन्होंने प्रति कुंतल 220 रुपया शुल्क एडवांस में लेना शुरू कर दिया है। शुल्क महंगा होने के कारण किसान आलू स्टोर नहीं ला रहा है। इससे उन्हें भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आलू कारोबारी व स्टोर मालिकों का मानना है कि इस बार लगभग पांच सौ करोड़ रुपये का नुकसान उन्हें होने वाला है। होली पर्व में भी आलू के दाम नहीं बढ़े हैं, ऐसे में अब दाम में सुधार की कोई उम्मीद भी नहीं है। लागत व मुनाफा न मिलने पर किसानों ने गांव की बागों में आलू को डंप कर उसको पालीथिन से ढकना शुरू कर दिया है। इसकी रखवाली खुद रात-दिन किसान कर रहे हैं। किसान आलू के दाम में गिरावट आने से बहुत परेशान है।
18 हजार लागत, 15 हजार भी मिलना मुश्किल
जिले के खरसेन का पूरा गांव में बड़े पैमाने पर आलू की खेती कराने वाले किसान जयराम सिंह का कहना है कि एक बीघा आलू की खेती करने में 15 से 18 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें खेत की तैयारी डेढ़ से दो हजार रुपये बीघा, आलू बीज पांच से छह हजार रुपये, उर्वरक छह हजार रुपये, पानी व कीटनाशक दो से तीन हजार रुपये लग जाते हैं। एक बीघे में 50 से 60 कुंतल आलू पैदा होता है। तीन सौ रुपये कुंतल बेचने के बाद रास्ते का भाड़ा व मंडी खर्च 80 से सौ रुपये कुंतल आता है। मौजूदा भाव में आलू बेचने से किसानों को प्रति बीघा चार से पांच हजार रुपये का घाटा हो रहा है।
कोल्ड स्टोर में भी हो सकती है मारामारी
जिले में आलू स्टोर करने के लिए सात शीतगृह हैं। इन शीतगृहों की स्टोर करने की क्षमता एक लाख 78 हजार 320 मीट्रिक टन की है। जबकि पैदावार ढाई लाख मीट्रिक टन ज्यादा है। ऐसे में यदि किसानों ने शीतगृहों में आलू जमा करना शुरू किया तो मारामारी मच सकती है।
आलू का दाम न बढ़ने से किसानों को बहुत नुकसान हुआ है। किसान लागत निकालने की भी स्थिति में नहीं है। यही कारण है कि कोल्ड स्टोर में आलू अब तक दस फीसदी ही जमा हुआ है, जबकि यह आंकड़ा अब तक 40 फीसदी तक पहुंच जाना चाहिए। कुल पैदावार के तिहाई हिस्से के मुताबिक लगभग पांच सौ करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। आने वाले दिनों में नुकसान की स्थिति साफ हो जाएगी।
मेवाराम, प्रभारी उद्यान अधिकारी