कौशाम्बी में डेढ़ सौ तालाब गुम हो गए हैं। इन तालाबों पर लोगों की खेती हो रही या फिर आलीशान भवन बन गए हैं। अधिकांश तालाबों का रकबा छोटा हो गया है। लिखित शिकायत के बाद भी कब्जा धारकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। बूंद-बूंद पानी का संकट बढ़ता जा रहा है, इसके बाद भी जिले के अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं।
जनपद में आठ हजार से अधिक तालाब थे। सरकारी अभिलेख इसके गवाह हैं। इनमें से डेढ़ सौ तालाब ऐसे हैं, जो गायब हो चुके हैं। वहीं अधिकांश तालाबों का रकबा छोटा हो गया है। जिला मुख्यालय से लेकर गांवों तक के तालाबों की स्थिति यही है। करारी, मंझनपुर में सबसे ज्यादा कब्जा हुआ है। मंझनपुर के सौ से अधिक लोगों को नोटिस दी जा चुकी है। सिराथू व चायल तहसील प्रशासन ने भी करीब तीन सौ से अधिक लोगों को नोटिस जारी की है। म्योहर, सरसवां, सरायअकिल, चरवा, सिराथू, बिदनपुर ककोढ़ा, भरवारी, चायल, बसुहार आदि जगहों पर बड़े पैमाने पर कब्जा हुआ है। इसके बाद भी अधिकारी तालाबों से कब्जा हटवाने की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
अधिकारियों का सारा फोकस मंझनपुर पर ही है, जबकि तमाम गांव ऐसे हैं, जहां तालाब की भूमि पर खेती हो रही है। सिराथू के टेंगाई गांव में यही हो रहा है। इसकी शिकायत भी हो चुकी है। इसके बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों ने पहल नहीं की। तालाब रकबे को चिह्नित किया गया, इसके बाद भी दोबारा लोगों ने कब्जा कर लिया। जिले भर में 150 तालाब गायब हैं। अधिकारियों के लिए इन तालाबों पर हुए कब्जे को खाली कराने की सबसे बड़ी चुनौती है। इसको देखते हुए दस साल के भीतर अधिकारियों ने करीब 450 तालाब मनरेगा से सुंदरीकरण कराए, लेकिन वह भी तमाम प्रयास के बाद उपयोग लायक नहीं हो सके। इन तालाबों पर करोड़ों रुपया खर्च हो चुका है।