खराब दिनचर्या, बिगड़ा खानपान और मानसिक तनाव उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर (बीपी) की वजह बन रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में बीपी की शिकायत लेकर पहुंच रहे मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। चिकित्सकों का कहना है कि पीड़ितों में अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। लोगों को जीवनशैली में सुधार और नियमित जांच की सलाह दी जा रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, भागदौड़ भरी दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों में कमी, असंतुलित खानपान और लगातार तनाव रक्तचाप बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। व्यस्तता के चलते लोग सेहत की अनदेखी करते हैं और समय पर जांच नहीं कराते। इससे बीमारी का पता देर से चल सकता है। लंबे समय तक बीपी नियंत्रित नहीं रहने पर हृदय, मस्तिष्क और गुर्दों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
सीएचसी करारी के अधीक्षक डॉ. बीबी अग्रवाल ने बताया कि अनियमित दिनचर्या और तनाव भी रक्तचाप को प्रभावित करते हैं। लोगों को नियमित रूप से बीपी की जांच करानी चाहिए। संतुलित खानपान, रोजाना टहलने, पर्याप्त नींद लेने और तनाव कम करने से रक्तचाप नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
लक्षण न दिखें, तब भी कराएं जांच
उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखना या घबराहट जैसी परेशानी हो सकती है। केवल लक्षणों से बीपी की पुष्टि नहीं होती। फिजिशियन डॉ. सुएब अंसारी के अनुसार, लंबे समय तक मानसिक तनाव से रक्तचाप बढ़ सकता है। सही स्थिति जानने के लिए नियमित जांच जरूरी है।
बरतें यें सावधानियां
समय-समय पर बीपी की जांच कराएं।
भोजन में नमक कम रखें और संतुलित आहार लें।
रोजाना टहलें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने के उपाय अपनाएं।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें और न ही खुद से दवा शुरू करें।