स्टॉल पर समूह की ओर से निर्मित सामग्रियों के साथ बैठी संध्या। स्रोत: विभाग
:: महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर रोजगार की राह पकड़ी, हर महीने करीब 3500 रुपये की हो रही आय
फोटो-59
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह रोजगार का जरिया बन रहे हैं। मूरतगंज विकासखंड के उजुक मोजू वलियापुर की संध्या सिंह भी समूह से जुड़कर अपनी पहचान बना रही हैं। चारिका महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से वह सफाई के उत्पाद और अचार बनाने के काम से जुड़ी हैं। इस काम से उन्हें हर महीने आमदनी हो रही है और वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
संध्या सिंह ने बताया कि समूह की महिलाएं चारिका ब्रांड के नाम से फिनायल, हार्पिक, फ्लोर क्लीनर और ग्लास क्लीनर तैयार करती हैं। इसके अलावा आम, कटहल, आंवला, मिर्च, मिक्स और नींबू का अचार भी बनाया जाता है। उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से समय-समय पर प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं को उत्पाद तैयार करने के साथ उनकी पैकेजिंग और बिक्री की जानकारी भी मिली।
बिक्री से हो रही बचत
संध्या बताती हैं कि सफाई उत्पाद तैयार करने में प्रति लीटर करीब 30 रुपये की लागत आती है, जबकि बिक्री 60 रुपये प्रति लीटर की दर से होती है। इस तरह प्रति लीटर 30 रुपये की बचत होती है। एक महीने में एक हजार लीटर उत्पादों की बिक्री से समूह को करीब 30 हजार रुपये की बचत होती है। वहीं, अचार से लगभग 20 हजार रुपये मासिक बचत होती है। समूह के हिसाब से प्रति सदस्य की औसत मासिक आय करीब 3500 रुपये है। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं को रोजगार मिला है। इससे वे अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी योगदान दे रही हैं।