गर्मी शुरू होते ही जिले के तालाबों का पानी गायब हो गया। इससे मवेशियों का गला तर करने के लिए संकट गहरा गया है। तालाबों में पानी नहीं होने से पशुओं का गला तर करने में पशुपालकों का पानी निकल रहा है। प्रशासन है कि मवेशियों के पानी को लेकर पहल तक शुरू नहीं कर सका है।
जिले की 498 ग्राम सभाओं और सात नगर पंचायतों में तालाबों की संख्या लगभग पांच हजार है। इनमें से 458 तालाबों का पांच साल पहले सौंदर्यीकरण कराया गया था और 988 तालाबों की अब तक मनरेगा से खुदाई कराई जा चुकी है। खुदाई के बाद गहरे हुए इन तालाबों में पानी का ठहराव अभी तक था। लेकिन गर्मी शुरू होते-होते इनका भी पानी गायब हो गया है। मार्च माह के अंत तक सूख चुके 80 फीसदी तालाबों ने पशुपालकों के समक्ष बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। मवेशियों को नहलाने और प्यास बुझाने के लिए तालाबों में पानी की कमी पशुपालकों के लिए समस्या बन गई है। उनके द्वारा पशुओं की प्यास हैंडपंपों के सहारे किसी तरह बुझा दी जाती है पर बदन की गर्मी शांत नहीं हो पा रही। तालाबों के सूख चुके पानी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासनिक अफसर हैं कि वह तालाबों में पानी भरवाने को लेकर कोई पहल करते नहीं देखे जा रहे हैं। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पशुपालकों को और कठिनाई का सामना करना होगा।
प्यास से हांफ रहे जंगली जीव जंतु
तालाबों का पानी गायब होने से जंगली जीव-जंतु प्यास से हांफने लगे हैं। शाम होते ही वह पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगते हैं। खेतों में लगे नलकूपों के आस-पास पानी के लिए नीलगाय, लोमड़ी, खरगोश, सियार का झुंड रात में पहुंचता है। नालियों में पानी मिला तो इन मवेशियों की प्यास बुझती है और पानी न होने पर वह इधर-उधर भटकते रहते हैं। तालाबों में पानी न होने से पक्षियों का भी बुरा हाल है। मोर, तोता, कबूतर आदि पक्षी पानी की तलाश में गांव घुसने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तालाबों का पानी सूखने से जंगली जीव जंतुओं का क्या हाल है।
नहर क्षेत्र के तालाबों में भी उड़ रही धूल
बारिश के पानी से लबालब होने वाले तालाबों का सूखना तो लाजिमी है। सिंचाई की जरूरत पड़ने पर किसान पनचक्की के सहारे तालाबों का पानी सोख लेते हैं। लेकिन नहरी क्षेत्र के तालाबों से धूल उड़ने की बात किसी को हजम नहीं हो रही। इसका प्रमुख कारण यह है कि नहरों में सिंचाई के लिए ही पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में तालाबों में जलभराव कैसे हो। पिछले साल डीएम के निर्देश पर नहरी क्षेत्र के तालाबों में पानी भरवाया गया था तो पशुपालकों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन इस साल माह भर से किशनपुर पंप कैनाल बंद चल रही है। ऐसे में तालाबों में पानी कैसे रहेगा। जिम्मेदार हैं कि बंद पड़ी नहर में पानी छोड़े जाने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।
अभी गर्मी शुरू हुई है। इससे निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। तालाबों में नहर व राजकीय नलकूपों के जरिए पानी भरवाया जाएगा। पालतू व जंगली मवेशियों को पानी की परेशानी नहीं होने पाएगी।
डॉ. दिनेश कुमार सिंह, सीडीओ