कृषि कानूनों के विरोध में विभिन्न राजनैतिक दलों की तरफ से भारत बंद का आह्वान मंगलवार को जिले में बेअसर साबित हुआ। नगरों से लेकर प्रमुख बाजारों में पुलिस और प्रशासन का सख्त पहरा रहा। बंद के समर्थन में कुछ राजनैतिक दलों के लोग सड़क पर उतरे, लेकिन, उन्हें प्रशासन ने गिरफ्तार कर लिया। समर्थ किसान पार्टी के लोग सिर्फ रास्ते में ही एसडीएम सदर राजेश चंद्रा को ज्ञापन सौंपकर लौट गए।
मंगलवार को कांग्रेस, सपा, आप, बहुजन मुक्ति मोर्चा, भाकियू समेत विभिन्न किसान संगठन की तरफ से भारत बंद का आह्वान किया गया था। प्रशासन ने जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दिया था। किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन पर पाबंदी लगाई गई थी। पुलिस और प्रशासन की सख्ती के कारण जिले में बंद का कोई खास असर देखने को नहीं मिला।
मंझनपुर, करारी, चायल, अजुहा, सिराथू, पश्चिमशरीरा पूरबशरीरा, करारी, सरायअकिल आदि नगरों में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम सक्रिय रहकर निगरानी करती रही। कारोबारियों ने बंद का समर्थन नहीं किया और रोज की तरह की सारी दुकानें खुली रहीं। इस दौरान विभिन्न संगठन पुलिस की सख्ती देख सिर्फ ज्ञापन देने की औपचारिकता निभाकर लौट गए।
पुलिस विभाग के मुताबिक विरोध-प्रदर्शन करने की तैयारी में लगे करीब 27 लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले जाया गया। यहां सभी का मेडिकल कराने के बाद देर शाम निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।
भाकियू ने की बैठक, चक्काजाम करने से पहले सौंपा ज्ञापन
भारत बंद के समर्थन में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन कार्यकर्ता जिला पंचायत में एकत्र हुए। जिलाध्यक्ष नूरूल इस्लाम ने बताया कि बैठक में तीनों कानून पर चर्चा करने के बाद किसान चौराहे पर सड़क जाम करने जा रहेे थे। इस दौरान एसडीएम राजेश चंद्रा व सीओ डॉ. केजी सिंह ने ज्ञापन लेकर किसानों को वापस कर दिया। इस दौरान बलवीर सिंह, सांताराम, विजय त्रिपाठी, चंदू तिवारी, सूर्यभान सिंह, ननकू लाल, प्रेम नरायण मौर्या, देवराज तिवारी, बड़े लाल, रमाकांत, भैयालाल आदि किसान मौजूद रहे। इसी तरह चायल व सिराथू तहसील में यूनियन के कार्यकर्ताओं ने कानून वापसी को लेकर ज्ञापन सौंपा।
सदर विकास खंड के पास रोके गए सकिपा कार्यकर्ता
तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग को लेकर समर्थ किसान पार्टी (सकिपा) कार्यकर्ता मंझनपुर चौराहे से नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट की तरफ बढ़े। इसकी जानकारी होने पर एसडीएम सदर राजेश चंद्रा व सीओ डॉ. केजी सिंह ने उन्हें सदर विकास खंड के पास रास्ते में ही रोक लिया। अफसरों के समझाने के बाद किसान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन देकर घर लौट गए। इस दौरान फूलचंद्र लोधी, अरुण प्रजापति, वेद प्रकाश यादव, राजवंत सिंह, रामशंकर यादव, रामलखन पटेल, राकेश दिवाकर, जुम्मन अली, सरूख अहमद, मो. नईम, अली रजा, सुनीता पटेल, गीता सरोज समेत कई लोग मौजूद रहे।
गिरफ्तार कार्यकर्ताओं से नहीं मिल सके एमएलसी
नव निर्वाचित विधान परिषद सदस्य डॉ. मानसिंह यादव सोमवार को विरोध-प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए सपा कार्यकर्ताओं से मिलने जिला कारागार जा रहे थे। इसकी जानकारी होने पर इंस्पेक्टर मंझनपुर मनीष पांडेय ने कोविड-19 के खतरे को देखते हुए एमएलसी के काफिले को रोक दिया।
इसके बाद एमएलसी व पुलिस से तीखी-नोकझोंक भी हुई। स्नातक विधायक डॉ. मानसिंह यादव ने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई लोकतंत्र के खिलाफ है। सपा नेताओं को जबरन घर से गिरफ्तार किया गया।
तमाम कायकर्ता हाउस अरेस्ट किए गए हैं। भाजपा सरकार किसान, गरीब, मजदूर व नौजवानों की रक्षा करने में पूरी तरह से फेल है। इस दौरान राजेश्वर सिंह, राजू पटेल, गुड्डू खान, अखिलेश यादव, संजीव कुमार, शबीह हैदर मीनू, जगदीश गुप्ता, वीरेंद्र सरोज, संदीप त्रिपाठी, पंकज, त्रिलोकी सिंह यादव, दिलशाद, मुजफ्फर बागी आदि लोग मौजूद रहे।
प्रसपा जिलाध्यक्ष समेत पांच गिरफ्तार
भारत बंद के समर्थन में दुकानें बंद कराने निकले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के जिलाध्यक्ष हरिलोचन सिंह यादव, नीलेश श्रीवास्तव सहित पांच कार्यकर्ताओं को सदर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार किसान विरोधी है। किसानों के समर्थन में वह शांतिपूर्वक विरोध जताने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें कलक्ट्रेट जाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया।
ज्ञापन देने जा रहे कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरेस्ट
कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने जा रहे कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरुण विधार्थी, वेद पांडेय सहित 11 लोगों को सदर कोतवाली पुलिस ने जिला पंचायत गेट के समीप से गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए सभी लोगों को फिलहाल कोतवाली में रखा गया है।
आप कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी
आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी भारत बंद का समर्थन किया। संगठन के जिलाध्यक्ष रिजवान अहमद बोग्गी की अगुवाई में कलक्ट्रेट की तरफ जा रहे कार्यकर्ताओं ने कोतवाली के समीप नारेबाजी की। इसके बाद कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा। साथ ही कोतवाली पुलिस को गिरफ्तारी दी। इस दौरान महासचिव आकाश वर्मा, मोहम्मद हसन, अली हुसैन, मोहम्मद आरिफ आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बंद सर्मथकों से ज्यादा सड़कपर थी फोर्स, शांति पूर्वक निपटी बंदी
कृषि कानूनों की वापसी को लेकर मंगलवार को भारत बंद का कोई असर नहीं दिखा। जितने भी लोग बंद के समर्थन में पहुंचे, उससे कहीं ज्यादा पुलिस और प्रशासन के लोग सड़कों पर मौजूद रहे। बंद समर्थक टुकड़ों में बंटकर मुख्यालय पहुंचे। यहां किसी ने गिरफ्तारी दी तो कोई सिर्फ ज्ञापन देकर वापस लौट गया।
जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह व एसपी अभिनंदन पूरे दिन भ्रमणशील रहकर पूरे हालात में नजर रख रहे थे। इसके अलावा तीनों एसडीएम, सीओ व थानेदारों के साथ तहसीलदार क्षेत्र में निगरानी कर रहे थे।
हालांकि जिले के किसी भी हिस्से से विवाद या हिंसक झड़पों की खबरें नहीं आईं। दोपहर तीन बजे तक बंद के कार्यक्रम के बाद गिरफ्तार सभी लोगों को पुलिस लाइन ले जाया गया। वहां मेडिकल कराने के बाद कुछ को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। वहीं आपराधिक छवि वाले लोगों को मजिस्ट्रेट ने जेल भेज दिया।
Police on the streets, India closed in Doaba ineffective- फोटो : KAUSHAMBI
Police on the streets, India closed in Doaba ineffective- फोटो : KAUSHAMBI