होली पर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। चेस्ट, नेत्र, ईएनटी, त्वचा और बाल रोग विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि केमिकल युक्त रंग, धूल और ठंडा पानी कई मरीजों की परेशानी बढ़ा सकता है। उन्होंने सावधानी से होली खेलने की सलाह दी।
चेस्ट फिजिशियन डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि अस्थमा और सांस के मरीज होली में भीगने और धूल-धुएं से बचें। केमिकल रंग और ठंडा पानी सांस की तकलीफ बढ़ा सकता है। नेत्र सर्जन डॉ. हेमंत यादव ने मरीजों को सलाह देते हुए बताया कि आंखों में रंग जाने से जलन, एलर्जी और संक्रमण हो सकता है। रंग लगने पर आंखों को रगड़ें नहीं, बल्कि तुरंत साफ पानी से धोएं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एमसी पाल ने बताया कि केमिकल रंगों से खुजली, दाने और एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है। होली खेलने से पहले शरीर पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं और हर्बल रंगों का उपयोग करें। इसी तरह नाक, कान, गला विशेषज्ञ विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्रधर द्विवेदी ने बताया कि कान और गले में रंग या गंदा पानी जाने से संक्रमण का खतरा रहता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश ने छोटे बच्चों को तेज रंग और ठंडे पानी से दूर रखने की सलाह दी है।
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आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल कॉलेज तैयार
होली पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सीएमएस डॉ. सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 30 बेड का विशेष वार्ड तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि एक्स-रे, सीटी-स्कैन और प्लास्टर विभाग 24 घंटे संचालित रहेंगे। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में एक सीनियर और चार जूनियर डॉक्टरों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है। संवाद
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होली को देखते हुए तैयारियां पूरी हैं। इमरजेंसी सेवाओं को बेहतर किया गया है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है। 30 बेड का विशेष वार्ड तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि त्योहार पर स्वास्थ्य सेवाएं सक्रिय रहेंगी। - डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य।