इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के परास्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को इस बार नई समस्या से जूझना पड़ेगा। परास्नातक में वर्तमान सत्र से च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करने की घोषणा की गई है। शिक्षकों की कमी की वजह से सीबीसीएस को लेकर पहले से ही सवाल खड़ा है, ऐसे में प्रवेश में देरी से मुसीबत और बढ़ गई है। जो स्थिति है उसे देखते हुए सेमेस्टर परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को दो महीने भी पढ़ाई के लिए नहीं मिलेंगे। खास यह कि इसी अवधि में उनके व्यक्तित्व का भी मूल्यांकन हो जाएगा।
विश्वविद्यालय की स्नातक, बीएएलएलबी, एलएलबी समेत सभी प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट समय से पहले तैयार हो गए थे। परिणाम आने के बाद दाखिले का काम भी तकरीबन खत्म हो चुका है, लेकिन परास्नातक प्रवेश परीक्षा के परिणाम के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। प्रवेश प्रकोष्ठ की ओर से जून के आखिरी सप्ताह में ही रिजल्ट निकालने की घोषणा की गई थी। जुलाई के पहले सप्ताह में तो प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी थी लेकिन शिक्षकों की लापरवाही की वजह से अभी तक कॉपियों का मूल्यांकन ही नहीं हुआ है।
ऐसे में महीने की आखिर तक भी रिजल्ट घोषित हो जाए तो गनीमत। ऐसे में इस बार भी परास्नातक कक्षाओं में अगस्त तक प्रवेश ही होते रहेंगे। इसके विपरीत इस साल से परास्नातक में सीबीसीएस लागू कर दिया गया है। इसके तहत अटेंडेंस पर भी नंबर मिलेंगे तो दिसंबर में सेमेस्टर परीक्षा हो जानी चाहिए। इस दौरान दशहरा और दीपावली की छुट्टी, छात्रसंघ चुनाव आदि को लेकर गतिरोध बना रहेगा। विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 500 से अधिक पद खाली हैं। ऐसे में प्रवेश प्रक्र्रिया में इस लेटलतीफी से परेशानी और बढ़ गई है।