रंगों के पर्व होली से ठीक पहले क्षेत्र के कई पेंशनरों की पेंशन खातों में न पहुंचने से त्योहार की खुशियों पर ग्रहण लग गया है। जहां एक ओर घर-आंगन में रंग और मिठास की तैयारी होनी चाहिए थी, वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग बैंक और जनसेवा केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। समय से भुगतान के आश्वासन के बावजूद देरी ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर बुजुर्ग अपनी मासिक जरूरतों के लिए पेंशन पर ही निर्भर हैं।
होली पर बच्चों और नाती के लिए कुछ मिठाई और कपड़े लेने की सोच रखी थी, लेकिन इस बार खाते में पैसा ही नहीं आया। बैंक गए तो वहां भी साफ जवाब नहीं मिला। त्योहार सामने है और जेब खाली है, इससे बड़ा दुख क्या होगा। - बजरंगबली उपाध्याय, 100 वर्ष, पेंशनर
होली त्योहार से संबंधित किराने से थोड़ा-बहुत सामान खरीदना था, लेकिन पेंशन न आने से खरीदारी नहीं हो पाई। सरकार कहती है समय से भुगतान होगा, पर हमारे खाते में अब तक कुछ नहीं पहुंचा। बुजुर्गों को कम से कम त्योहार पर तो इंतजार न कराना चाहिए। - बनवारी लाल 85, पेंशनर
जिन लाभार्थियों की पेंशन किसी तकनीकी या दस्तावेजी कारण से रुकी है, वे होली की छुट्टी के बाद अपने आवश्यक कागजात लेकर कार्यालय आएं। जांच के बाद कारण स्पष्ट होने पर पेंशन बहाल कर संबंधित खातों में धनराशि भेज दी जाएगी। -दिलीप पटेल, जिला समाज कल्याण अधिकारी
बजरंगबली उपाध्याय