पंचायत चुनाव के प्रधान पद पर एक-एक वोट की टक्कर होती है। इससे वर्ष 2015 का चुनाव भी अछूता नहीं रहा। जनपद के 498 ग्राम पंचायतों में करीब 100 सीटों पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। इनमें से करीब 25 सीटों पर तो हार-जीत का अंतर 10 से भी कम वोटों का रहा। चायल के बिलासपुर और नेवादा के सराययुसुफ गांव में दो प्रत्याशी को बराबर मत मिले। इससे इन दोनों ग्रामसभा में प्रधान का निर्णय लाटरी से हो पाया।
मतगणना के दौरान कांटे के मुकाबले की बानगी कड़ा के चकमानिकपुर सैयद राजे, कौशाम्बी के छेकवा, सरसवां ब्लाक के धवाड़ा, कुम्हियावां, रक्सौली, पूरबसरावां, हटवा, चायल के निजामपुर पुरैनी आदि सौ से ज्यादा गांवों में देखने को मिली। इसमें पूरब सरावां गांव में सुनील चौधरी सिर्फ 4 मतों से जीतकर प्रधान बने। सुनील को 261 और उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी मितानी को 257 वोट प्राप्त हुए। इसी तरह से रक्सौली गांव में प्रधान पद पर हारजीत का अंतर सिर्फ 2 वोट का रहा। रक्सौली गांव में प्रधान निर्वाचित हुए रामभवन को 253 वोट मिले थे। वहीं दूसरे नंबर पर रहे महेश कुमार को 251 मत मिले। चायल के निजामपुर पुरैनी गांव में रामसिंह पटेल सिर्फ 3 वोट से जीत सके। रामसिंह को 307 और उनके प्रतिद्वंदी राकेश कुमार 304 वोट प्राप्त हुए थे। इन सबके बीच चायल के बिलासपुर और नेवादा ब्लाक के सराय युसुफ ग्रामसभा में तो प्रधान पद का निर्णय दो प्रत्याशियों को बराबर-बराबर वोट मिलने के कारण लाटरी के माध्यम से करना पड़ा।