लंबरदार...बड़े काश्तकार, साधन संपन्न और रसूखदार व्यक्ति को गांवों में पहले इसी पदवी से नवाजा जाता है। यदा-कदा अब भी गांव में ज्यादा चलते-पुर्जे वाले आदमी को लोग ऐसी ही संज्ञा देते रहते हैं। यही लंबरदार अब प्रधान के चुनाव में वोटों के ठेकेदार बन बैठे हैं। वे प्रत्याशियों को थोक में अपनी बस्ती, कुनबा और बिरादरी का वोट दिलाने का सब्जबाग दिखाकर जेब भरने की कोशिश में लगे हैं। इसमें गंवई राजनीति के पुराने धुरंधरों से लेकर, छुटभैया नेता, बिरादरी के मुखिया सभी शामिल हैं। प्रत्याशियों को 50-100 वोट दिलाने की गारंटी लेकर उनसे हजारों का सौदा किया जा रहा है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिपं और बीडीसी सदस्य के निर्वाचन के बाद प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य चुनने की प्रक्रिया शुरू है। चार चरणों में होने वाले इस चुनाव के पहले और दूसरे चरण के लिए मंझनपुर, मूरतगंज, नेवादा, चायल ब्लाक की 224 प्रधान पद के लिए नामांकन भी हो चुका है। पर्चा दाखिला के साथ प्रधान बनने के लिए करीब 3000 उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं। नामांकन करके सभी उम्मीदवार वोट के लिए घर-घर दस्तक देने लगे हैं। एक-एक वोट के लिए तिकड़म लगाया जा रहा है। प्रत्याशी गांव के असरदार लोगों का भी समर्थन हासिल करने को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
मंशा है कि इन रसूखदारों की मदद मिलने से प्रधान की कुर्सी हथियाने में आसानी होगी। उम्मीदवारों की इस मानसिकता को भांपते हुए लंबरदार भी हाथ आया मौका गंवाना नहीं चाहते हैं। ये लोग वोट के ठेकेदार बनकर जेबें भरने में जुट गए हैं। इसमें बिरादरी के मुखिया, गंवई राजनीति के पुराने धुरंधर, छुटभैया नेता सभी शामिल हैं। बिरादरी में खुद का असर बताकर थोक में 50-100 वोट दिलाने का सब्जबाग दिलाकर उनसे सौदा किया जा रहा है। ऐसा कौशाम्बी की लगभग सभी 498 ग्रामसभाओं में देखने को मिल रहा है। बता दें कि देश में सबसे कांटे का मुकाबला प्रधान पद के चुनाव का ही होता है। यहां एक-एक मतदाता प्रत्येक प्रत्याशी से रूबरू रहता है। यही कारण है कि पंचायत चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे उम्मीदवारों में एक-एक वोट के लिए लड़ाई होती है।