करारी (ब्यूरो)। आमिना के लाल के पैदाइश के मौके पर करारी कस्बे में शुक्रवार की रात गुम्बदे खिजरा कांफ्रेंस हुई। इस महफिल में देशभर से जुटे नामी-गिरामी शायरों ने जहां अपने कलाम से अकीदतमंदों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं मौलानाओं ने तकरीर में इल्म और तालीम पर जोर दिया। सीख दी कि नबी के दिखाए राह पर चलते हुए ऊंची तालीम हासिल करने से ही संसार की सारी बुलंदी हासिल की जा सकती है।
करारी कस्बे के आजाद नगर स्थित कर्बला मैदान के सामने शुक्रवार की रात मुस्लिम नौजवान कमेटी की ओर से गुम्बदे खिजरा कांफ्रेस की महफिल सजाई गई थी। आमिनी के बेटे हजरत मोहम्मद मुस्तफा के पैदाइश मौके पर आयोजित इस महफिल का आगाज तेलावते कुरान कारी मोहम्मद जाकिर ने किया। बता दें कि यह कार्यक्रम मुसलमानों के आखिरी नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा की याद में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम में भाग लेने आए शायरों ने रातभर मुस्तफा के जीवन को बयां करते हुए एक से बढ़कर एक कलाम पेश किया। फरूखाबाद से आए शायर शकील आरफी ने पढ़ा कि मनसब के लालच में फंसकर दीन के टुकड़े मत कीजे, दीन की खातिर कर्बो बला में कट गए कितने काम के पेड़...।
इसी तरह से शायर शजर मकनपुरी ने पढ़ा कि मुश्किलों ने जो सताया, तो अली याद आया, जब कोई काम न आया, तो अली याद आया...उनका यह कलाम सुनकर महफिल झूम उठी। शेरो-शायरी के दौर के साथ ही मौलानाओं ने तकरीर भी की। मौलाना तनवीर अहमद ने तकरीर करते हुए तालीम पर जोर दिया। कहाकि नबी के रास्ते पर चलते हुए तालीम हासिल करो। इसी की बदौलत कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। सीख दी कि हुजूर अकरम ने भी फरमाया है कि मर्द, औरत पर फर्ज है कि वह इल्म हासिल करे। कहाकि पूरी दुनिया में जो भी कौम अशिक्षित है, वही कमजोर भी है। मौके पर मौलाना मोहम्मद इमरान, नगर पंचायत चेयरमैन मौला बख्श, अहमद हबीब, शाहिद रजा, इश्तियाक अहमद, अवैश अंसारी, शमशाद बख्श आदि मौजूद रहे।