जिले की 75 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत अन्नपूर्णा स्टोर बनाने की स्वीकृति दो महीने पहले ही मिल गई। एक स्टोर बनाने में 8.50 लाख रुपये खर्च होंगे। जिले भर में इन स्टोरों के निर्माण में 6.37 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लेकिन, दो महीने बाद भी बजट नहीं मिला। वहीं, ग्राम प्रधानों ने कहा कि पिछली योजनाओं का बजट पांच महीने से अटका है। इस वजह से उधार में कोई फर्म निर्माण सामग्री देने को तैयार नहीं है।
जिले में 577 राशन की दुकानें संचालित हैं। शासन से पात्र गृहस्थी एवं अंत्योदय योजना के तहत राशन का वितरण कराया जाता है। जिले में डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था के तहत कोटे की दुकान पर राशन पहुंचाने का आदेश है। कई कोटेदारों की दुकानें संकरी गलियों में होने से वहां तक राशन लदा वाहन नहीं पहुंच पाता है। समस्या को देखते हुए शासन की ओर से मनरेगा योजना के तहत अन्नपूर्णा स्टोर बनवाए जा रहे हैं। पहले चरण के 72 अन्नपूर्णा भवन तैयार हो चुके हैं।
अब दूसरे चरण के तहत 75 अन्य ग्राम पंचायतों में अन्नपूर्णा स्टोर के निर्माण की स्वीकृति मिली है। लेकिन, बजट न मिलने की वजह से प्रधान स्टोर निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जिस वजह से लेटलतीफी हो रही है।
जिले की सभी 451 ग्राम पंचायतों में योजना के तहत कराए गए विकास कार्यों में सामग्री मद का 15 करोड़ रुपये पिछले कई महीने से बकाया चल रहा है। इसका भुगतान पिछले पांच महीने से नहीं हुआ है। ऐसे में अब फर्म संचालक भी उधारी देने से इन्कार करने लगे हैं।
गांव में अन्नपूर्णा स्टोर बनवाने के लिए शासन से निर्देश आया हैं। स्टीमेट बन गया है। मनरेगा से काम होना है। छह महीने से भुगतान नहीं होने के कारण फर्म संचालक अब उधार निर्माण सामग्री देने को तैयार नहीं हैं। मान सिंह यादव, ग्राम प्रधान- थांबा अलावलपुर
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मनरेगा से गांव में अन्नपूर्णा स्टोर बनना हैं। छह महीने से मनरेगा का पैसा नहीं मिल रहा है। पिछला पैसा चुकता होने के बाद ही फर्म संचालक सामग्री देने को तैयार है। बजट आते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।
सविता यादव, ग्राम प्रधान-भैला मकदूमपुर