भरवारी। चरवा के चरक मुनि आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बृहस्पतिवार को श्रीमद्जगद्गुरु मलूक पीठाधीश्वर द्वाराचार्य राजेंद्र दास ने सदैव सत्य का सहारा लेने का संदेश दिया।
बताया कि कर्दम जी का जन्म ब्रह्माजी की छाया से हुआ था। जन्म लेने के बाद उन्होंने ब्रह्माजी से पूछा पिता जी मेरे लिए क्या आदेश है? ब्रह्माजी के आदेश पर वह तपस्या करने लगे। इसके बाद ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर विवाह करने का आदेश दिया। कहा कि भगवान भी चाहते हैं कि ऋषियों का जीवन गृहस्थमय होने से उनकी संतानें भी समाज को सही मार्ग दिखा सकेंगी। इस पर कर्दम जी ने भगवान को पुत्र रूप में पाने की शर्त रखी।
भगवान शर्त मानते हुए कहा कि फिलहाल तुम्हें मनु की पुत्री देवहुति से विवाह करना पड़ेगा। कर्दम जी ने कहा कि एक पुत्र होते ही वह संन्यास ले लेंगे। देवहुति के स्वीकार करने पर दोनों का विवाह हो गया। विवाह के बाद कर्दम जी फिर तपस्या में लीन हो गए और देवहुति उनकी सेवा में तत्पर हो गईं। लंबी साधना के कारण वह देवहुति को भूल गए। याद दिलाने पर कर्दम जी ने देवहुति को वैवाहिक सुख दिया।
इस दौरान बरम बाबा महाराज, धनंजय दास महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत यमुना गिरि महाराज, फलाहारी बाबा (प्रयागराज), जिला जज बृजेश कुमार मिश्रा, एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव, सीओ चायल योगेंद्र कृष्ण नारायन, प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।