धान खरीद केंद्रों में 16 दिन बाद 30 कुंतल की धान की खरीदारी हुई है। ऑनलाइन की व्यवस्था ने संकट की इस घड़ी में किसानों की कमर तोड़ दी है। इससे किसान परेशान हैं। आधार कार्ड लिंक न होने से किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है। वही नकदी भुगतान न होने के कारण भी किसान क्रय केंद्रों से दूर भाग रहे हैं।
धान खरीद के लिए जिले में कुल 39 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में अबकी बार ऑनलाइन धान की खरीददारी हो रही है। उन्हीं किसानों का धान खरीदा जा रहा है, जिनका आधार कार्ड बना हुआ है। इससे वह किसान परेशान हैं, जिनका आधार कार्ड अब तक नहीं बना है। एक नवंबर से धान खरीदने का निर्देश शासन ने दिया था, लेकिन आनलाइन की इस नई समस्या के चलते अब तक 30 कुंतल ही धान खरीदा जा सका है। किसानों को नकद भुगतान भी नहीं किया जा रहा है।
आरटीजीएस के माध्यम से किसानों के खाते में रुपया ट्रांसफर किया जा रहा है। यही कारण है कि किसान धान क्रय केंद्रों में अपना धान लेकर नहीं जा रहे हैं। वह किसान भी दूरी बनाए हैं, जिनके पास आधार कार्ड नहीं है। किसानों का कहना है कि वह अपना धान क्रय केंद्र में लेकर जाएं तो कैसे। रुपया है नहीं, किराया भाड़ा कौन देगा। आनलाइन भुगतान से उन्हें दिक्कत नहीं है, लेकिन मजदूरी व किराया तो उन्हें तत्काल देना है। इसका इंतजाम वह कैसे करें।
34 हजार टन है धान खरीद का लक्ष्य
इस वर्ष जिले के 39 धान खरीद केंद्रों में 34 हजार 300 टन धान खरीदा जाना है। यह लक्ष्य शासन ने तय किया है। 16 दिन में कुल 30 कुंतल धान की खरीदारी हुई है। इससे साफ है कि अबकी धान की खरीद में जनपद पिछड़ेगा और किसानाें को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
व्यापारियों ने भी बनाई दूरी
मंडी समिति में किसानों का धान खरीदने वाले व्यापारियों ने भी मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। आठ नवंबर के पहले तक प्रतिदिन चार से पांच ट्रक धान लदकर बाहर जाता था। इसके बाद से एक ट्रक भी धान नहीं लोड हुआ। व्यापारी रमेश मौर्य का कहना है कि जब रुपया ही नहीं है तो धान की खरीद कैसे हो। किसान व पल्लेदार को नकद रुपया चाहिए। बैंक से इतनी रकम नहीं मिल रही है कि वह किसानों का धान खरीद सकें और मजदूराें को प्रतिदिन की दिहाड़ी दें।
ऑनलाइन खरीददारी की वजह से दिक्कत आ रही है। अब इसमें तेजी लाई जाएगी, जल्द से जल्द धान खरीद का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
विनीता मिश्रा, डिप्टी आरएमओ