जिले में विजय दशमी के दिन दशहरा मेले का आयोजन मंझनपुर, सरायअकिल, मनौरी बाजार व दारानगर गांव में होता है। इन स्थानों पर रामलीला का मंचन मुकुट पूजन के साथ शुरू हो चुका है। मौजूदा समय में हो रही रामलीला इलाकाई लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रात के आठ बजते ही दर्शक खा-पीकर रामलीला मंचन स्थल को रवाना हो जाते हैं। इसके बाद देर रात रामलीला का लुफ्त उठाने के बाद घर आते हैं। सबसे अधिक प्यारा मंचन दारानगर में देखने को मिल रहा है। यहां दिन में हो रही लीला को देखने के लिए दर्जनों गांवों के अलावा दूर दराज से दर्शक आते हैं।
दारानगर की रामलीला देखने के लिए उमड़ी भीड़
मंझनपुर (ब्यूरो)। जिले की ऐतिहासिक दारानगर रामलीला में दूसरे दिन विश्वामित्र यज्ञ का मंचन कलाकारों ने किया। इस दौरान भगवान राम व लक्ष्मण द्वारा यज्ञ में विघभन डालने वाले राक्षसों का वध किया गया। रामलीला मंचन देखने के लिए इलाकाई लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
दारानगर की रामलीला अपने अद्भुत मंचन के लिए विख्यात है। यहां की लीला को देखने के लिए दूर दराज से दर्शक आते हैं। खास बात यह है कि यहां की रामलीला का मंचन मंच पर होकर अलग-अलग स्थानों पर किया जाता है। शुक्रवार को विश्वामित्र यज्ञ लीला का मंचन सादीपुर स्थित हनुमान मंदिर परिसर में किया गया। इस दौरान यज्ञ में विघ्न डालने पहुंची ताड़का, सुबाहु व खर-दूषण का भगवान श्रीराम व लक्ष्मण ने बध कर ऋषि मुनियों को राक्षसों के आतंक से छुटकारा दिलाया।
भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला...
चौथी रात रामजन्म से फुलवारी लीला तक का हुआ मंचन
मंझनपुर (ब्यूरो)। मंझनपुर की रामलीला में चौथी रात को कलाकारों ने रामजन्म, नगर दर्शन व फुलवारी लीला का मंचन किया। इस दौरान भगवान श्रीराम के जन्म लेते ही मंचन स्थल जयश्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। चौथे का दिन रोचक मंचन देख दर्शक गदगद रहे।
मंझनपुर कस्बे की रामलीला का मंचन 18 सितंबर को मुकुट पूजन व नारदमोह के साथ शुरू हुआ। 20 सितंबर को बारिश हो जाने के कारण राम जन्म, मुनि आगमन व ताड़का की लीला नहीं हो सकी। 21 सितंबर को इसके साथ-साथ नगर दर्शन व फुलवारी लीला का मंचन कलाकारों ने किया। भगवान राम के जन्म लेते ही मंचन स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। सबसे अधिक आकर्षण फुलवारी लीला के दौरान रहा। मां गौरी की पूजा के लिए मंदिर गई मांता सीता ने फूल तोड़ने पहुंचे प्रभु श्रीराम को देखा तो मंत्रमुग्ध हो गई। इस दौरान माता सीता से सहेलियों द्वारा की गई अठखेलियों का मंचन लोगों ने बगैर पलक झपकाए देखा।
मुकुट पूजन के साथ शुरू हुई चरक मुनि आश्रम की लीला
चरवा (ब्यूरो)। विकास खंड चायल के चरवा गांव स्थित चरक मुनि आश्रम व भगवान श्रीराम के विश्राम स्थल पर 101वीं रामलीला का मंचन शुक्रवार को मुकुट पूजन के साथ शुरू हुआ। मुकुट पूजन आदर्श श्रीराम लीला कमेटी एवं सांस्कृतिक कला केंद्र चरवा के अध्यक्ष रवी पांडेय ने किया।
रामलीला का मंचन चित्रकूट से आए कलाकारों द्वारा किया जाएगा। जानकारी देते हुए समिति के अध्यक्ष ने बताया कि चरक मुनि आश्रम की रामलीला ने सौ साल पूरे कर लिए हैं। इस बार मंचन का 101 वां साल है। तीन अक्तूबर को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दिन गांव में दंगल मेले का भी आयोजन होगा।