हड़ताली कर्मचारियों के आगे जनता की आवाज दब चुकी है। लेखपाल हो अथवा संविदा कर्मी, अफसरों की बेबसी का फायदा उठाकर वह अपने-अपने तेवर दिखा रहे हैं। कहीं कोई काम नहीं हो रहा है। कार्यकत्रियों की जिद से कुपोषित बच्चें आहें भर रहे हैं तो तहसीलों में वादकारी व प्रमाण पत्र के लिए युवा छटपटा रहे हैं। इस मामले में डीएम ने अपने हाथ खड़े करते हुए साफ कर दिया है कि शासन का मामला है, वह कुछ नहीं कर सकते हैं।
जिला मुख्यालय एक पखवारे से हड़ताली कर्मचारियों की मांगों से गूंज रहा है। लेखपाल, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, रोजगार सेवक, विपणन, आशा, समेत कई विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मंगलवार से पशु चिकित्सक हड़ताल पर जा रहे हैं। कई और संविदा कर्मचारी भी इस आग में कूदने की तैयारी कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए राज्य कर्मी व संविदा कर्मी अपनी-अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
इनकी वजह से विकास कार्य थम सा गया है। रोजगार सेवकों की वजह से मनरेगा का कार्य प्रभावित है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के कारण केंद्र बंद चल रहे हैं। हजारों कुपोषित बच्चों पर इनकी वजह से संकट टूट पड़ा है। भूमि संबंधी मामलों की रीढ़ कहे जाने वाले लेखपालों ने तो लोगों को खासा परेशान कर दिया है। विपणन विभाग के हड़ताल से राशन वितरण भी प्रभावित हो रहा है। जिले की सभी तहसीलों का कामकाज ठप है। तहसील मौजूदा समय शिकायत सेल की तरह हो गई है।
हजार से ज्यादा आवेदन पत्र डंप
तहसीलों में एक हजार से ज्यादा आवेदन पत्र डंप चल रहे हैं। लेखपालों की रिपोर्ट न लगने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। तीनों तहसीलों में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए युवक इधर-उधर घूम रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद आवेदक रिपोर्ट लगवाने के लिए परेशान हैं। इनकी वजह से कई लोग जेलों में बंद हैं। जमानत होने के बाद भी अभिलेखों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, इसलिए इनकी रिहाई नहीं हो पा रही है।
न कटेगा वेतन, न मानदेय
जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह भी हड़ताली कर्मचारियों की वजह से परेशान हैं, लेकिन कुछ कर सकने की स्थिति में नहीं है। उनकी ओर से न तो किसी का वेतन कटेगा , न ही मानदेय। डीएम ने बताया कि हड़तालियों की मांग शासन से है, वह क्या कर सकते हैं। जब यह पूछा गया कि उनके स्तर से क्या कार्रवाई हो रही है, तो उन्होंने यही जवाब किया कि इस मामले में शासन ही फैसला लेगा।