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ओडीएफ अभियान में धांधली कर रहे ग्राम प्रधान

Wed, 08 Feb 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के अभियान को प्रधान धता बता रहे हैं। मानक के अनुरूप न बनने वाले शौचालयों में सेक्रेटरी अपना हिस्सा लेकर चुप्पी साध ले रहे हैं। अफसर हैं कि चुनावी व्यस्तता के चलते गांवों में चल रहे खेल की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में मानक को दरकिनार कर बनवाए जा रहे शौचालयों को ध्वस्त होने में समय नहीं लगेगा। शौचालय ध्वस्त होते ही ग्रामीण फिर से खुले में शौच जाना शुरू कर देंगे।
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     498 ग्राम सभाओं वाले जिले को पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त कराने का अभियान चलाया जा रहा है। शासन के निर्देश के बाद डीएम की देखरेख में डीपीआरओ ने बबुरा, जलालपुर टेंगाई, शहजादपुर, भड़ेसर, चक बिजलीपुर सहित 111 गांवों को ओडीएफ बनाने में सफलता भी मिली। बाकी के गांवों में जिला पंचायत राज अधिकारी शौचालयों की किस्त भेजकर निर्माण कराने की कवायद कर रहे हैं, लेकिन कमाई के चक्कर में ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी शौचालयों का निर्माण ठेकेदारों से कराने लगे हैं। ठेकेदार कमीशन और अपनी बचत निकालने में मशगूल हैं। ऐसे में उनके द्वारा शौचालयों का निर्माण घटिया ईट, कमजोर मसाले से कराया जा रहा है।

इतना ही नहीं किसी भी शौचालयों में बेसिन, पानी टंकी की व्यवस्था नहीं कराई जा रही। बानगी के तौर पर सदर ब्लॉक के उखैया खास, कोतारी पश्चिम सहित दर्जनभर गांवों को लिया जा सकता है।  मानक के विपरीत बनवाए जा रहे इन शौचालयों को अफसर चुनावी व्यस्तता के चलते देख नहीं पा रहे हैं। अफसरों की व्यस्तता को देख सेक्रेटरी और ग्राम प्रधान ओडीएफ अभियान को धता बताने में लगे हैं।
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गंगा एक्शन प्लान के शौचालयों में गड़बड़ी
जिले के चार ब्लॉकों की 33 ग्राम सभाओं को गंगा एक्शन प्लान में शामिल किया गया था। गांवों की गंदगी नदी में पहुंचकर गंगा के पानी को दूषित न कर सके इसलिए इन ग्राम सभाओं को दस हजार से अधिक शौचालयों की रकम वर्ष 2014 में दी गई थी। धनराशि पहुंचने के बाद ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों ने जमकर बंदरबांट किया। शासन ने धनराशि भेजने के बाद जो निर्माण का जो मानक निर्धारित किया था, उसके मुताबिक शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया। विकास खंड मूरतगंज की कुछ ग्राम सभाएं तो ऐसी हैं जहां पर खाते से लोगों ने रकम तो निकाल ली, लेकिन शौचालय नहीं बन सका। जानकारी होने के बाद अफसरों ने दबाव बनाना शुरू किया तो केवल खानापूर्ति ही की गई। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद ग्राम प्रधानों ने काम जस का तस ठप कर दिया है।

जारी की जा रही नोटिस
जिले के आठों ब्लॉकों में बनवाए गए शौचालयों में मानक की अनदेखी की शिकायत योजना को देख रहे डीपीसी ने डीपीआरओ से की। डीपीसी की शिकायत के बाद डीपीआरओ संबंधित एडीओ पंचायत के जरिए संबंधित प्रधान और सचिवों को नोटिस भेजवा रहे हैं। नोटिस के बाद भी शौचालय मानक के अनुरूप नहीं बनवाए गए तो संबंधित ग्राम प्रधान व सचिव के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर संबंधित को सुधार कराने की नोटिस दी जा रही है। चुनावी व्यस्तता के चलते विकास कार्यों की ओर ध्यान कम जा पा रहा है। चुनाव बाद अभियान चलाकर शौचालयों में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कमल किशोर, डीपीआरओ
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