ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी बुधवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही अनेक तीर्थों के दर्शन व दान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
शास्त्रों में इसे अचला एकादशी भी कहा गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि, सुख-समृद्धि, यश और वैभव की प्राप्ति होती है। इस लोक में सुख भोगने के बाद अंत में बैकुंठ लोक की प्राप्ति का भी फल मिलता है।
हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि अपरा एकादशी का व्रत मकर संक्रांति, पुष्कर स्नान, काशी में शिवरात्रि व्रत और गया में पिंडदान के समान पुण्यदायी माना गया है।
अपरा एकादशी का मुहूर्त
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 मई को दोपहर दो बजकर 52 मिनट से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 13 मई को दोपहर एक बजकर 29 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 13 मई को रखा जाएगा। व्रत का पारण 14 मई को सुबह पांच बजकर 31 मिनट से लेकर सुबह आठ बजकर 14 मिनट के बीच किया जाएगा।
ज्येष्ठ मास में पड़ रहीं चार एकादशी
इस बार अधिक मास के कारण ज्येष्ठ मास दो महीने का रहेगा। अधिक मास पड़ने के कारण एक विशेष योग बन रहा है, जिसमें चार एकादशी व्रत आएंगे। इस दौरान अपरा, पद्मिनी, परम और निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह संयोग भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन बातों का रखें ध्यान
अपरा एकादशी के दिन झूठ बोलने व क्रोध करने से बचें। इस दिन लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन का सेवन न करें। दान-पुण्य करने से व्रत का फल और बढ़ जाता है। विष्णु जी की चालीसा का पाठ करें और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें।