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दोआबा के 46 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में लहलहाएगी धान की फसल

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लॉक डाउन में घर लौटे प्रवासियों की फौज दोआबा में खेती-किसानी के लिए सुखद संदेश दे रही है। कृषि विभाग ने प्रवासियों की दिलचस्पी देख इस बार खरीफ का रकबा साढ़े चार हजार हेक्टेयर बढ़ाकर 72,522 कर दिया है। इसमें अकेले 46 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है। बाकी बचे 26 हजार हेक्टेयर में मोटा अनाज और तिल की बुवाई कराई जाएगी। माना जा रहा है कि मौसम ने साथ दिया तो इस मर्तबा कम से कम दस फीसदी तक उत्पादन बढ़ना तय है। उद्योग विहीन दोआबा में अधिसंख्य लोगों की जीविका का एकमात्र साधन खेती-किसानी है। मगर, मौसम की दगाबाजी, बिजली-पानी और रासायनिक उर्वरकों की अनुपलब्धता के कारण लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही खेती से मोह त्यागकर यहां के हजारों लोग महानगरों की ओर रुख कर लिया था।
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अब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते उन्हीं कामगारों का महानगरों से मोहभंग हो गया है। लॉक डाउन के दौरान जिले में तकरीबन 47 हजार प्रवासी श्रमिक घर लौट आए हैं। स्थानीय स्तर पर दो वक्त की रोटी का दूसरा कोई सहारा नहीं देख इन कामगारों ने वापस परंपरागत खेती की ओर रुख कर लिया है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने इस मर्तबा खरीफ का रकबा बढ़ा दिया है। पिछले साल आच्छादित 68017 हेक्टेयर क्षेत्रफल के मुकाबले इस बार 72,522 हेक्टेयर में खरीफ की फसलें आच्छादित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें अकेले 46091 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई कराई जाएगी।
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खरीफ की फसलों का दायरा इस बार बढ़ाया गया है। प्रवासी श्रमिकों ने इसी तरह दिलचस्पी के साथ खेती में मेहनत किया तो अनाज उत्पादन में इजाफा होना तय है।
मनोज कुमार गौतम-जिला कृषि अधिकारी
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