परिषदीय विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की अब खैर नहीं होगी। सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की फिर से जांच कराई जाएगी। अवैध रूप से नौकरी करने वाले शिक्षकों को न सिर्फ बर्खास्त किया जाएगा बल्कि, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वेतन के रूप में ली गई सारी रकम की वसूली की जाएगी। शासकीय निर्देश के बाद जिले में सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए टीम गठित करने का काम शुरू हो गया है। शासन के इस फरमान से जिले भर के शिक्षकों में हलचल मच गई है।
फर्जी शिक्षकों के हो रहे खुलासे के बाद शासन ने प्रदेश भर में बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा, और उच्च शिक्षा विभाग के स्कूल-कालेजों में तैनात सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का फिर से सत्यापन कराने का आदेश दिया है। आकड़ों पर गौर करें तो जिले में परिषदीय विद्यालयों में तकरीबन चार हजार शिक्षक तैनात हैं। जबकि अनुदानित विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की संख्या 345 है। इनके अलावा शिक्षामित्र और अनुदेशकों की भी जांच होगी। बताते चलें कि जिले में पहले भी फर्जी शिक्षकों की तैनाती का खुलासा हो चुका है। जानकारों का कहना है कि पारदर्शी जांच हुई तो सैकड़ों की संख्या में फर्जी शिक्षक जेल जा सकते है।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परिषदीय विद्यालयों में नौकरी करने वाले 35 शिक्षकों को एक साल के अंदर बर्खास्त किया जा चुका है। इनमें डॉ. भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय मेरठ से बीएड की फर्जी डिग्री के अलावा टीईटी के फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे बने शिक्षक शामिल हैं। हालांकि, इनमें से 20 शिक्षकों ने अदालत से स्थगनादेश हासिल कर लिया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिक विद्यालय में तैनात शिक्षिकाओं के सभी शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच दूसरे दिन भ्री जारी रही। गुरुवार को बीएसए दफ्तर में उनके मूल प्रमण पत्र के साथ एक छायाप्रति भी जमा करवाई गई। शिक्षिकाओं से प्रमाणपत्र लिए जाने के बाद उन्हें उसकी रिसीविंग भी दी गई। बीएसए राजकुमार पंडित ने बताया कि उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों के साथ ही स्थाई निवास की भी जांच की जाएगी। माना जा रहा है कि दूसरे के प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाली शिक्षिकाओं के स्थाई निवास का जब तक सत्यापन नहीं होगा तब तक नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा नहीं होगा।