जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्साधिकारियों की गैर मौजूदगी में उनकी कुर्सी खाली नहीं रहेगी। यहां अब ब्लॉक स्तर पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नियुक्ति चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। मरीजों को अब हरदम स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हर ब्लॉक में दो-दो स्वास्थ्य टीमें बनीं हैं। हर टीम में दो-दो डॉक्टर व अन्य कर्मचारी लगाए गए हैं। इनकी मुख्य जिम्मेदारी स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों की सेहत की जांच करना और बीमार बच्चों को उपचार के लिए सीएचसी भेजना है। अब इनकी जिम्मेदारियां बढ़ा दी गईं हैं।
सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि जिले में 35 पीएचसी हैं। अक्सर इन पीएचसी में तैनात डॉक्टरों के अवकाश पर रहने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ता है। जिलाधिकारी की ओर से पीएचसी में डॉक्टर के न रहने पर आरबीएसके के चिकित्सकों से ओपीडी कराने के निर्देश दिए हैं। ताकि, बिना उपचार के मरीजों को न लौटना पड़े।
इसके अलावा टीमें अपने क्षेत्र में अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उनके स्वास्थ्य की निगरानी भी करेंगी। इसी तरह गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की मॉनीटरिंग भी आरबीएसके की टीम करेगी। सीएमओ ने बताया कि सभी ब्लॉकों की आरबीएसके की टीमों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। इस पर अमल करने में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।