जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में 15 अगस्त को नवजात की मौत वार्मर पर जलने से नहीं बल्कि बर्थ स्पेशिया से हुई थी। तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। सीएमएस ने डीएम समेत वरिष्ठ विभागीय अफसरों को भेज दी है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दीपक सेठ ने बताया कि नवजात की मौत की असलियत का पता लगाने के लिए तीन डॉक्टरों का पैनल गठित कर विस्तृत जांच कराई गई।
चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शिशु बर्थ स्पेस्यिा से ग्रसित था। इस बीमारी में बच्चा पैदा होने के बाद रोता नहीं है। उसके पेट में गंदा पानी चला जाता है। ऐसी स्थित में उसे एसएनसीयू में रखकर इलाज किया जाता है। 15 अगस्त के दिन वार्ड में 12 बच्चे गंभीर अवस्था में भर्ती थे। वार्ड में रात्रि ड्यूटी की शिफ्ट में डॉ. करुणेश कुमार मिश्रा के अलावा दो स्टॉफ नर्स भूपेंद्र सिंह व आनंद प्रकाश थे। भूपेंद्र सिंह बिना सूचना व बिना प्रतिस्थानी किए अपनी ड्यूटी छोड़कर चले गए।
ड्यूटी पर आनंद प्रकाश अकेला पड़ गया। उसी समय बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। स्टॉफ ने कार्डियोपल्मोनरी रिसेक्शन देकर बच्चे की जान बचाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। रिसेक्शन के दौरान ही बच्चे के सीने में कुछ खरोंच आ गई थी। इसकी सूचना न्यायपीठ बाल कल्याण समिति, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश शासन, अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रयागराज मंडल, जिलाधिकारी कौशाम्बी, मुख्य चिकित्साधिकारी कौशाम्बी और जिला प्रोबेशन अधिकारी को भेज दी गई है।