ब्लाॅक क्षेत्र के कुछ ग्राम पंचायतों में हैंडपंपों के रिबोर और मरम्मत के नाम पर जमकर खेल किया जा रहा है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सिर्फ फर्म का नाम दिखाकर भुगतान निकाला जा रहा है। फर्मों से कब और क्या खरीदा गया इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। इसका प्रमाण आपको दुर्गापुर, जलालपुर जवाहरगंज और मोहम्मदाबाद ग्राम पंचायत में देखने को मिल जाएगा।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान वित्तीय वर्ष में नेवादा के दुर्गापुर ग्राम पंचायत में पंचम राज्य वित्त से 13 जून को बलराम के घर के पास हैंडपंप रिबोर कार्य का 47031, आंगनबाड़ी केंद्र में हैंडपंप रिबोर कार्य का 53245, केशन के घर के पास हैंडपंप रिबोर का 47031 रुपये का भुगतान निकाला गया।
13 जून को ही हैंडपंप मरम्मत कार्य का अलग-अलग क्रमशः 19200, 19890 और 19884 रुपये का भुगतान किया गया। सभी भुगतान मातेश्वरी ट्रेडर्स नाम की फर्म के खाते में किया गया। इसी तरह जलालपुर जवाहरगंज गांव में तीन मई को पंचम राज्य वित्त योजना से 23186 रुपये का भुगतान हैंडपंप मरम्मत का हरीओम इंटरप्राइजेज फर्म को किया गया।
25 जून को इसी फर्म के खाते में पांच नग सोकपिट निर्माण कार्य का भुगतान 47186 रुपये में हुआ। पांचों सोकपिट बनाने में सिर्फ एक ही मिस्त्री और मजदूर अरुण कुमार ने काम किया। अरुण कुमार के खाते में ग्राम पंचायत की ओर से 10800 रुपये का भुगतान किया गया। कुछ ऐसा ही हाल मोहम्मदाबाद ग्राम पंचायत का भी है।
10 मई को अलग-अलग हैंडपंप रिबोर का क्रमशः 43060, 45253, 43109 और 25548 रुपये का भुगतान पंचम राज्य वित्त से बाबू जी मशीनरी स्टोर को किया गया। हैंडपंप रिबोर किस स्थान पर हुआ इस बारे में पोर्टल पर कुछ दर्ज नहीं है। हैंडपंप रिबोर कार्य की मजदूरी 14858 रुपये अंकित केसरवानी नामक मजदूर के खाते में की गई है।
बताया जा रहा है कि अंकित केसरवानी पंचायत सचिव का प्राइवेट मुंशी है। सात अगस्त को 19174, 19724 और 14924 रुपये हैंडपंप मरम्मत का भुगतान भी बाबू जी मशीनरी स्टोर फर्म में हुआ है। सात अगस्त को ही गांव में चूना और ब्लीचिंग खरीद का 10150 रुपये व हैंडपंप प्लेटफाॅर्म निर्माण कार्य का भुगतान स्नेह हार्डवेयर पेंट एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फर्म के खाते में दर्ज है।
तीनों ही ग्राम पंचायतों में छोटी-छोटी धनराशि के रूप में निकाली गई इस बड़ी रकम के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अलग-अलग बाउचर अपलोड किए गए हैं लेकिन फर्मों का एक भी बिल अपलोड नहीं है। कई बाउचरों में दुरुस्त कराए गए हैंडपंपों की संख्या भी नहीं दी गई है।
ऐसे में यह सारे भुगतान सवालों के घेरे में हैं लेकिन न तो ब्लाॅक के और न ही जिले के जिम्मेदार इस ओर ध्यान दे रहे हैं जबकि यह पूरी तरह से नियमों के विपरीत है। बिना बिल के कोई भुगतान हो ही नहीं सकते।
ग्राम पंचायतों में कराए गए किसी भी कार्य का भुगतान बिना फर्मों के बिल लगाए हो ही नहीं सकता। यदि पोर्टल पर भुगतान की गई धनराशि का बिल अपलोड नहीं किया गया है तो यह नियम के विपरीत है। तीनों ग्राम पंचायतों में बगैर बिल के हुए भुगतानों की जांच कराई जाएगी। - नीरज मिश्रा, एडीओ पंचायत नेवादा