लोकसभा चुनाव का नामांकन दाखिल करते वाले छेद्दू रैदास
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न पंफलेट और न ही प्रचार का हाबा-ढाबा। बस हाथ में नगड़िया और गांव वालों की भीड़ जुटाकर अपने लिए वोट मांगना। साथ में साइकिल पर लदा बर्तन बिक गया तो घर की दाल रोटी का जुगाड़। बात हो रही है जिले में लोकसभा चुनाव का नामांकन दाखिल करने वाले छेद्दू रैदास की।
17 वीं लोकसभा के होने वाले चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन बिजलीपुर गांव निवासी छेद्दू रैदास ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। बर्तन की फेरी लगाने वाले छेद्दू की खासियत है कि वह साथ में नगड़िया लेकर चलता है। नगड़िया बजाकर भीड़ जुटाना और फिर बर्तन बेचना उनका पेशा है।
गुरुवार को छेद्दू ने अपना नामांकन निर्दल प्रत्याशी के रूप में दाखिल किया। वर्ष 2000 में छेद्दू ने बीडीसी का चुनाव जीता था। इसके बाद 2005 में विधान सभा का चुनाव लड़ा। इसके बाद वह जिला पंचायत सदस्य के लिए हुए तीन चुनावों में मैदान में आए लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2012 में छेद्दू प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सामने सिराथू विधान सभा से चुनाव मैदान में था।
2014 के लोक सभा चुनाव में भी उन्होंने सांसद का चुनाव लड़ा लेकिन उसे अंतिम पायदान यानि 3340 मत पाकर ही संतोष करना पड़ा। इस बार लोक सभा के चुनाव में छेद्दू एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनावी समर में कूद गए हैं। छेद्दू का कहना है कि उसके पास प्रचार का हाबा-ढाबा नहीं है लेकिन जिले की जनता ने उसे जिताया तो वह क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करेगा।