मंझनपुर। शुक्र है, जिले में मध्यप्रदेश सरीखे हालात नहीं दिखे। वरना, सरकारी अस्पतालों में मासूमों की मौत का तांडव होता। यहां सरकारी अस्पतालों में मासूमों के इलाज के लिए कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो बने हैं लेकिन वहां बच्चों का इलाज करने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इन खैराती अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले बच्चे या नीम-हकीम की तर्ज पर दवा लेकर घर लौट जाते हैं, या फिर हालत बिगडने पर उन्हें रेफर-रेफर के खेल में जान गंवाना पड़ जाता है।
कौशाम्बी में सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 27 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। सरकारी दावा है कि इन अस्पतालों में बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक के हर मर्ज का इलाज किया जाता है। इससे इतर, अस्पतालों के हालात काफी विपरीत है। अमर उजाला ने इस बाबत मंगलवार को पड़ताल कराई तो चौकाने वाली हकीकत सामने दिखी। सीएचसी सरायअकिल में नवजात बच्चों को रखने के लिए वार्मर की व्यवस्था तो है लेकिन मशीन संचालन के खातिर डॉक्टर नहीं हैं। 30 बेड के इस अस्पताल में दिसंबर से लेकर 14 जनवरी तक 203 बच्चों का संस्थागत प्रसव में जन्म हुआ। बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण नौ बच्चों की हालत बिगडने पर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। चार बच्चे जन्म से ही कुपोषित थे, जिन्हे इलाज के लिए रेफर किया गया। प्रसव के दौरान पांच बच्चों की मां के गर्भ में ही मौत हो गई। सीएचसी बारा में भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण आर्या का कहना है कि दिसंबर में 200 बच्चों की ओपीडी हुई। बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से 10 बच्चों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। सीएचसी सिराथू में एक अक्तूबर से लेकर 31 दिसंबर तक 784 बच्चों का जन्म हुआ। यहां भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। जन्म के बाद 45 बच्चों की हालत बिगडने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। यहीं हाल सीएचसी चायल का भी है। यहां इलाज के लिए आने वाले बच्चों की हालत बिगडने पर रेफर के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।
फिजीशियन देते हैं दवा
मंझनपुर। सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती नहीं होने के कारण जनरल फिजीशियन ही अस्पताल आने वाले बच्चों को दवा देते हैं। बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे सीधा रेफर कर दिया जाता है।
यह बात सही है कि जिले की सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। अस्पताल में जनरल फिजीशियन ही बच्चों की बीमारी का इलाज करते हैं। गंभीर हालत वाले बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल में बच्चों का मुकम्मल इलाज कराया जाता है। चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन व स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को कई बार पत्र लिखा जा चुका है।
डॉ. पीएन चतुर्वेदी, सीएमओ