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आंसू पोंछना तो दूर, सूरत भी नहीं दिखाई

Thu, 16 Apr 2015 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
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मंझनपुर/शमसाबाद। आसमान से अन्नदाताओं पर आफत बरस रही है। मौसम की मार में उस शमसाबाद गांव के भी 200 किसान परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं, जिसे कौशाम्बी के सांसद विनोद सोनकर ने गोद लिया है। गांव के लोगों को इसका दर्द और गुस्सा भी है। किसानों का कहना है कि मदद तो दूर, बर्बादी देखने और आंसू पोंछने को भी सांसद गांव नहीं आए।
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प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर कौशाम्बी के सांसद विनोद सोनकर ने नौ नवंबर को सिराथू तहसील के शमसाबाद गांव को गोद लिया था। कभी पीतलनगरी के रूप में विख्यात इस गांव के लोगों को लगा था कि अब उनकी बदहाली मिट जाएगी। गरीबों के झोपड़े मिटेंगे। रास्ता, जलनिकासी, पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं से उन्हें जूझना नहीं पड़ेगा। हर, दुख-दर्द में उनका रहनुमा उनके साथ होगा।

पर, उनकी यह सोच अब तार-तार हो चुकी है। आसमान से बरसी आफत में कौशाम्बी के अन्य हिस्सों की तरह शमसाबाद के भी अन्नदाता पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। मार्च में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से गिरकर फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। मूसलाधार बारिश ने बची-खुची उम्मीदें भी मिटा दी हैं। उपज बर्बाद होने से गांव के करीब 200 किसान सिसक रहे हैं। पर, उनके आंसू पोंछने न सांसद आए, न अफसर-कर्मी।
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मौसम की मार से बर्बाद हुए गांव के किसान रामदत्त ओझा, अतहर हुसैन, हरिहर शरण, गुलाब सिंह, चंदू, श्रीराम वर्मा, गुलाब सिंह, महंत यादव, रामचंद्र, शिवप्रसाद, कमल सिंह, बरफीलाल, राम बहादुर, संतोष यादव आदि ने बताया कि खेत से 10 दिन का निवाला निकलना मुश्किल है। चंदू ने बताया कि चार बीघे में गेहूं की फसल बोई थी। कम से 40 कुंतल अनाज मिलने की उम्मीद थी। चार कुंतल भी मिल जाए, तो बहुत है। कमल सिंह ने तो भर्राए गले से बताया कि एक बीघे में 50 किलो गेहूं निकला है।

सिराथू तहसील के शमसाबाद गांव को गोद लिए लगभग छह महीने होने को हैं। अब तक यहां विकास शून्य ही बना हुआ है। खुद ग्राम प्रधान रविशंकर कसेरा ने बताया कि विकास के नाम पर गांव में 13.23 लाख रुपये की लागत का शव दाहगृह का निर्माण मंजूर हुआ है। पर, अब तक इसका भी काम शुरू नहीं हो सका है। गांव को गोद लेने के बाद 29 नंबर को डीएम समेत सभी अफसरों की फौज लेकर सांसद ने गांव में चौपाल लगाई थी। तब सांसद से गांववालों ने गांव की समस्याएं गिनाई थी। प्रधान की मानें तो सांसद ने चौपाल के दौरान पानी की टंकी, कन्या इंटर कालेज, हादसे के सबब बने बिजली के जर्जर तार बदलाने, सीसी मार्ग और जलनिकासी की नालियों के निर्माण की मांग की थी। सांसद ने जल्द इन मांगों को पूरा कराने का वादा ग्रामीणों से किया था। पर, अब तक उनका वादा वादा ही रहा है।

सांसद द्वारा गांव को गोद लिए जाने के बाद उन गरीबों की आंखों में चमक आ गई थी, जो भूमिहीन, बेघर हैं। उन्हें लगा था कि उन्हें अब निश्चित रूप से आवासीय सुविधा मिलेगा। पर, 4200 आबादी और 750 परिवार वाले इस गांव में सिर्फ चार गरीबों को ही इंदिरा आवास की सौगात मिली है।

सांसद का गोद लिया गांव शमसाबाद प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान के लिए भी जिले का आदर्श गांव नहीं बन सका है। बुधवार को इस गांव में घूमने पर जहां नालियां कचरे से पटी क्षतिग्रस्त मिलीं। वहीं गलियां गंदगी से भरी थी। सबसे बड़ी अनदेखी तो इस गांव में शौचालय निर्माण में देखी गई। इस गांव में कुल 650 शौचालयों के निर्माण होना है। पर, अब तक गांव में सिर्फ 200 शौचालयों का ही निर्माण हो सका है।

शमसाबाद गांव में ग्रामीणों के उपचार के लिए बरसों पहले राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय खोला गया था। इस अस्पताल में दो साल से डॉक्टर की नियुक्ति नहीं है। इससे गांववालों को सीएचसी सिराथू जाने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव को सांसद के गोद लेने से उम्मीद थी कि अब अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती हो जाएगी। पर, अस्पताल को डॉक्टर नहीं मिले। अब भी कम्पाउंडर लालचंद्र और चतुर्थश्रेणी के कर्मचारी बनवारी लाल के भरोसे की अस्पताल का संचालन हो रहा है।
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