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बाद कैसे होगी बेटी की शादी

Thu, 16 Apr 2015 12:14 AM IST
पुष्पेश त्रिपाठी/अमर उजाला कौशाम्बी
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नेवादा। सल्लहा गांव का झल्लर अब दुनिया में नहीं है। 18 दिन बाद यानि तीन मई को उसकी नातिन की शादी है। पूरा परिवार शादी की तैयारी में जुटा था। पर, मौसम की मार ने उसके परिवार का निवाला ही नहीं घर की खुशियां भी छीन ली। मौत पर गमगीन घरवाले अब इस चिंता में डूबे हैं कि अब बेटी की शादी कैसे होगी। बेमौसम की बारिश से आई तबाही के बाद बेटियों की शादी का ऐसा ही गम पनारा गोपालपुर, टिकरा और बसुहार गांव के भी कई किसानों को है।
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चायल तहसील के सल्लहा (मुस्तफाबाद) गांव के किसान झल्लर पासी के तीन बेटे हैं। उसके पास जमीन तो सिर्फ 10 बिस्वा है। पर, बंटाई पर खेत लेकर बेटों के साथ वह किसानी करके जीविका चला रहा था। खेती और मेहनत-मजदूरी से ही उसके घर का सारा खर्च निकलता था। इस साल उसने अपने बेटे घसीटे की बेटी अनीता (19) की शादी भी तय कर रखी थी। तीन मई को बारात आनी है। परिवार को उम्मीद थी कि खेती अच्छी है। कुछ खर्च इससे चल जाएगा। शेष मेहनत-मजदूरी और नाते-रिश्तेदारी की मदद ले ली जाएगी।

पर, मौसम की मार ने परिवार पर कहर ढा दिया है। बर्बाद हुई खेती के सदमे में झल्लर की बुधवार को मौत हो गई। इससे पूरा परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। क्योंकि कुदरत के कहर ने जहां इस परिवार के सालभर का निवाला छीन लिया है, वहीं बेटी के ब्याह की खुशियां भी छीन ली हैं। ऐसी ही आफत कटैनी बसुहार गांव के 23 वर्षीय रोहन सिंह और श्रीनाथ पर भी पड़ी है। खेत में पानी भर जाने से उसकी चार बीघा गेहूं की फसल डूबकर बर्बाद हो चुकी है। पिता हैं नहीं। खेती के भरोसे ही वह बहन की शादी की तैयारी में जुटा था। एक मई को बहन की शादी है। अब वह परेशान है। श्रीनाथ की भी बेटी की शादी 22 मई को है, जबकि टिकरा गांव के धर्मपाल और पनारा गोपालपुर गांव के दुखीलाल की बेटी की शादी 19 मई को है।
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