मंझनपुर। आसमान से पानी की जगह बरसी तबाही का मंजर देख किसानों की आंखों से आंसू बह रहे हैं। अन्नदाता परेशान हैं। उन्हें चिंता है कि निवाले का इंतजाम कहां से होगा। खाद, बीज, जुताई, सिंचाई की उधारी कहां से अदा होगी। खेती के लिए बैंकों से लिया कर्ज कैसे जमा करेंगे।
कौशाम्बी के किसानों के लिए दो साल से मौसम खलनायक बना हुआ है। पिछले साल भी गेहूं आलू की जैसे ही फसल तैयार हुई थी। फरवरी महीने में भीषण बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई थी। उसके बाद खरीफ के सीजन में समय से बारिश नहीं होने पर फसल चौपट हुई, तो गेहूं और आलू की बुआई के सीजन में जोरदार बारिश से खेतों में पानी भर गया। इससे लाखों रुपये का बीज सड़ गया था। दुबारा बुआई की गई।
लहलहाती फसलें देख किसानों को लगा था कि नुकसान की भरपाई हो जाएगी। पर, मार्च-अप्रैल महीने में पड़ी मौसम की मार से उनका सब कुछ बर्बाद हो गई। तेज हवाओं के साथ गेंहू की फसल गिरकर तबाह हो गई। खेतों में फसलों की बर्बादी यह मंजर देखकर किसान आंसू बहा रहे हैं। बता दें कि जिले में 66 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई थी। मौसम की मार से 70 फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे हजारों किसान और उनके परिवारवालों के सामने निवाले का संकट खड़ा हो गया है। खेतों में बर्बाद फसलें देखकर उन्हें चिंता है कि बुआई, जुताई, सिंचाई, खाद-बीज की उधारी कैसे चुकता होगी।
सरसवां ब्लाक के बख्शी का पुरा गांव के उग्रसेन सिंह ने बताया कि उनकी 10 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह से तबाह हुई है। खेती के लिए पांच लाख रुपये का केसीसी ऋण है। इसी तरह से मेघराज के ऊपर 2.50 लाख, मुन्नालाल पर 1.50 लाख की केसीसी बकाया है। वहीं गिरधरपुर गढ़ी गांव के किसान अमृतलाल तो खेत में बर्बाद हुई गेहूं की फसल समेटते हुए शनिवार की सुबह सिसकते दिखे। रूआंसे गले से बताया कि 10 बिस्वा निजी और डेढ़ बीघा खेत बंटाई पर लेकर गेंहू की खेती की थी। कर्ज लेकर किसानी की थी। अब काश्तकार का कर्ज कहां से भरेंगे।