चरवा (कौशाम्बी)। कौशाम्बी के चरवा में स्थित रामजूठा तालाब के किनारे वन जाते समय भगवान राम ने विश्राम किया था। इसकी तस्दीक राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास दिल्ली के शोधार्थियों ने भी की है। अयोध्या से लेकर लंका तक शोध करने वाले इन शोधार्थियों का एक दल सोमवार को चरवा पहुंचा। यहां सत्संग-पूजा के साथ इन लोगों ने भगवान राम के विश्रामस्थलों के सौंदर्यीकरण की अलख जगाने का संकल्प लिया।
राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास दिल्ली की ओर से राम अवतार शर्मा राम वनगमन मार्ग के शोध कार्य में अपने दल के साथ 20 बरसों से जुटे हैं। सोमवार को उनका दल चरवा पहुंचा। उन्होंने बताया कि इन 20 साल में उनके दल ने अयोध्या से लंका तक उन स्थानों की खोज वाल्मीकि रचित रामायण, तुलसीकृत मानस और अन्य धर्मग्रंथों के आधार पर की है। राम वनगमन मार्ग और भगवान के विश्रामस्थल को चिह्नित करने में जुटे दल के मुखिया राम अवतार शर्मा ने बताया कि वन में 14 साल तक रहने के दौरान भगवान राम ने 249 स्थानों पर विश्राम किया था। इनमें कौशाम्बी में चरवा भी शामिल है।
शोध संस्थान के लोगों ने चरवा को अयोध्या से निकलने के बाद भगवान के 16वें विश्रामस्थल के रूप में चिह्नित किया है। बता दें कि चरवा स्थित रामजूठा तालाब को पहले से ही रामविश्राम स्थल के रूप में यहां के लोग जानते-मानते रहे हैं। लोगों का कहना है कि रात्रि विश्राम के बाद भगवान ने सुबह इसी ताल में स्नान किया था, तभी से 18 बीघे के दायरे में स्थित इस तालाब को लोग रामजूठा तालाब कहने लगे थे।
उन्होंने बताया कि राम वन गमन मार्ग और भगवान के विश्रामस्थलों के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा बनाकर उनका दल संस्थान को उपलब्ध कराएगा। साथ ही भगवान से जुड़े इन धर्मस्थलों के कायाकल्प की अलख भी जगाई जाएगी। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य रजनीश पांडेय के अलावा चरवा के तमाम ग्रामीण भी मौजूद थे।