उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के इतिहास में शुक्रवार रात नया अध्याय जुड़ गया। पैसेंजर से टकराकर जख्मी हुए युवक को बचाने के लिए लोको पायलट ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए बीच रास्ते में ट्रेन रोक दी, फिर गार्ड की मदद से उसे सिराथू रेलवे स्टेशन तक सुरक्षित पहुंचाया। यहां से रेलवे पुलिस उसे इलाज के लिए प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल ले गई। अब एनसीआर की ओर से ट्रेन चालक तथा गार्ड को सम्मानित किए जाने की योजना है।
दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर शुक्रवार शाम कानपुर से चलकर सूबेदारगंज (प्रयागराज) जाने वाली पैसेंजर ट्रेन अटसराय रेलवे स्टेशन से सिराथू की तरफ बढ़ी ही थी तभी 18.48 बजे पोल संख्या 887/16-18 के बीच 20 वर्षीय एक युवक ट्रेन से टकराकर जख्मी हो गया। घटना देख ट्रेन चालक ने बिना अनुमति ट्रैक पर ही गाड़ी रोककर गार्ड अभिषेक शुक्ला को खबर दी।
फिर चालक तथा गार्ड ने यात्रियों की मदद से जख्मी युवक को ट्रेन में बिठाया और सिराथू रेलवे स्टेशन पहुंचे। इस बीच सूचना होने पर जीआरपी के सिपाही सुजीत दुबे व अमित कुशवाहा ने एंबुलेंस को खबर दी। युवक को इलाज के लिए एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया, जहां नाजुक हालत देखकर डॉक्टरों ने उसे प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया।
फिलहाल प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में युवक को भर्ती कराया गया है, लेकिन वह अपना नाम व परिवार के किसी सदस्य का मोबाइल नंबर नहीं बता पा रहा है। आरक्षी अमित कुशवाहा ने बताया कि इसी वजह से युवक की पहचान नहीं हो सकी है। एनसीआर के इतिहास में यह अब तक की पहली घटना मानी जा रही है।
एनसीआर के इतिहास में पहली बार इस तरह का मामला सामने आया है। ट्रेन में अगर कोई यात्री बीमार हो जाता है, तो लोको पायलट व गार्ड अगले स्टेशन पर गाड़ी खड़ी कर उसका उपचार कराते हैं। अनुमति के बिना कहीं पर भी ट्रेन रोकी नहीं जा सकती। हां, अगर ट्रेन से कटकर किसी मनुष्य या मवेशी की मौत हो जाती है तो ट्रैक से शव हटवाने तक ट्रेनें अक्सर रोकी जाती हैं। फिलहाल पैसेंजर के चालक व गार्ड को सम्मानित करने पर विचार हो रहा है।
अमित सिंह, पीआरओ-एनसीआर