जिला कचहरी परिसर में पिंक टॉयलेट (महिला शौचालय) की व्यवस्था न होने से महिला वादकारी और महिला अधिवक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दूरदराज से मुकदमे की तारीख पर आने वाली महिलाएं दिनभर न्यायालय में रुकती हैं लेकिन परिसर में उनके लिए अलग से स्वच्छ शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बार एसोसिएशन ने इसके लिए कई बार नगर पालिका से मांग की लेकिन अब तक सुविधा नहीं मिल सकी।
कचहरी परिसर में पिंक शौचालय नहीं है। ऐसे में महिलाओं को सबसे अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। यहां बने सार्वजनिक शौचालय महिला और पुरुष दोनों के लिए है। जोकि हमेशा गंदा रहता है। ऐसे में यहां जाना भी सहज नहीं होता। जबकि यहां प्रतिदिन करीब 200 महिलाओं का आना-जाना होता है। इनमें महिला अधिवक्ता भी शामिल हैं।
- कचहरी में महिला अधिवक्ताओं की संख्या बढ़ रही है लेकिन बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। पिंक टॉयलेट की जरूरत अब बहुत जरूरी हो गई है। सीता, अधिवक्ता
- कई बार मुवक्किल महिलाएं शौचालय की सुविधा न होने से परेशानी में आ जाती हैं। यह न केवल असुविधाजनक है बल्कि शर्मिंदगी की स्थिति भी पैदा करता है। रोशनी अग्रहरी, अधिवक्ता
सीता, अधिवक्ता