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Navratri : देवी के कात्यायनी स्वरूप का भक्तों ने किया दर्शन-पूजन, जयकारों से गुंजायमान रहा मंदिर परिसर

Thu, 03 Apr 2025 06:03 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशाम्बी

सार

पुराणों के मुताबिक कात्यायन ऋषि ने तपकर देवी से वरदान मांगा था कि आप पुत्री के रूप में मेरे कुल में पैदा हों। देवी ने कात्यायन ऋषि की प्रसन्नता के लिए अपना अजन्मा स्वरूप त्याग कर पुत्री रूप में जन्म लिया। पिता के गोत्र से जुड़ने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा।
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कड़ा स्थित मां शीतला के दरबार में उमड़ी भक्तों की भीड़। - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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चैत्र नवरात्र के छठवें दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की गई। 51 वीं शक्तिपीठ शीतला धाम कड़ा समेत अन्य देवी मंदिरों में बृहस्पतिवार को भक्तों का तांता लगा रहा। विधि-विधान से श्रद्धालुओं ने शक्ति की पूजा-अराधना कर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान देवी के जयकारे से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे।

पुराणों के मुताबिक कात्यायन ऋषि ने तपकर देवी से वरदान मांगा था कि आप पुत्री के रूप में मेरे कुल में पैदा हों। देवी ने कात्यायन ऋषि की प्रसन्नता के लिए अपना अजन्मा स्वरूप त्याग कर पुत्री रूप में जन्म लिया। पिता के गोत्र से जुड़ने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। इनकी अराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इन्हीं मान्यताओं के चलते नवरात्र के छठे दिन मां के कात्यायनी स्वरूप के दर्शन-पूजन के लिए देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी।

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51 वीं शक्तिपीठ शीतला धाम कड़ा में देवी के शृंगार और मंगला आरती के बाद भोर में पट खोला गया। कपाट खुलते ही कतार में खड़े भक्तों ने मां का जयकारा लगाते हुए दर्शन पूजन शुरू किया। दर्शन-पूजन का यह सिलसिला देर रात तक अनवरत जारी रहेगा। यहां स्थानीय के अलावा, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, वाराणसी समेत पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में भक्तों हुजूम पहुंचा।

तमाम भक्तों ने पहले गंगा स्नान किया। इसके बाद नारियल, चुनरी लेकर मां का जयकारा लगाते हुए मंदिर परिसर पहुंचे। शक्ति पीठ शीतला धाम मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष आत्मप्रकाश पंडा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि मां को दही और हल्दी का लेपन करने से कुंवारी कन्याओं,युवाओं का विवाह विवाह जल्द हो जाता है। शीतलाधाम के अलावा मंझनपुर स्थित दुर्गा मंदिर, पश्चिमशरीरा स्थित झारखंडी मंदिर, सेलरहा स्थित मसुरिया मंदिर, किशुनपुर अंबारी स्थित अंबारी मंदिर समेत जिले के विभिन्न कस्बों, बाजारों मेंं स्थापित देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।

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