मंझनपुर। लंबित मुकदमों के निस्तारण के लिए शनिवार को जिला न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत लगी। इसमें कई बरसों से लंबित 5815 मुकदमे सुलह-समझौते के आधार पर निपटे। इस दौरान अर्थदंड के साथ ही दुर्घटना, बैंकों में ऋण की अदायगी आदि के रूप में 2.33 करोड़ रुपये की वसूली भी की गई।
साथ ही न्यायमूर्ति मोटर दुर्घटना के पीड़ितों में 17 लाख रुपये का चेक वितरित किया। इससे पहले लोक अदालत का उद्घाटन करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति और कौशाम्बी के प्रशासनिक न्यायाधीश महेशचंद्र त्रिपाठी ने न्यायिक अफसरों और अधिवक्ताओं को अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों से जुड़े रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें प्राचीन न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप हैं, क्योंकि तब सुलह-समझौते के आधार पर बडे़ से बड़े विवाद निपटा लिए जाते थे।
लंबित मुकदमों को बोझ न्यायालयों से हटाने के उद्देश्य से शनिवार को कौशाम्बी में राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई थी। इसका शुभारंभ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति महेशचंद्र त्रिपाठी ने किया।
उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम प्राचीन न्याय प्रणाली के नजदीक है। कहाकि सभी को सुलह-समझौते के आधार पर न्याय मिले, यही इसका मूल है। इस दौरान उन्होंने यहां की न्याय पालिका और कार्यपालिका के बेहतर समन्वय की सराहना भी की। कहाकि यही कारण है कि कौशाम्बी की कानून-व्यवस्था अन्य जनपदों से बेहतर है। इससे पहले जनपद न्यायाधीश उमेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत की महत्ता लोगों को समझाई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एसीजेएम सुरजन सिंह ने बताया कि इस वर्ष अब तक विधिक साक्षरता शिविरो के माध्यम से 5814 छोटे-छोटे वादों का निस्तारण किया जा चुका है।
वहीं शनिवार को लगी राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर कुल 5815 मुकदमों का निस्तारण किया गया। साथ ही अर्थदंड, दुर्घटना वाद और बैंकों के ऋण की अदायगी के रूप में 2 करोड़ 33 लाख 44300 रुपये की वसूली भी की गई। इस मौके पर पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी परमानंद शुक्ल, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेमनाथ शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष नर नारायण मिश्र, जिलाधिकारी राजमणि यादव, एसपी रतनकांत पांडेय आदि मौजूद रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत के मौके पर आए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति महेशचंद्र त्रिपाठी ने इस दौरान दीवानी न्यायालय परिसर में वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र की आधारशिला भी रखी। बता दें कि अब तक जनपद न्यायालय में इस समाधान केंद्र का भवन नहीं था। जहां बैठकर सदस्यगण समाधान के माध्यम से छोटे-छोटे विवादों का निस्तारण कर सकें। इससे पहले कौशाम्बी आने पर न्यायमूर्ति का पुलिस की टुकड़ी द्वारा सलामी दी गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नर नारायण मिश्र ने न्यायमूर्ति महेशचंद्र त्रिपाठी के सामने वकीलों के बैठने के चैंबर निर्माण की मांग की। उन्होंने न्यायमूर्ति को बताया कि चैंबर निर्माण के लिए 50 लाख रुपये डंप है। पर, जमीन की समस्या के कारण इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायमूर्ति ने जनपद न्यायाधीश और जिलाधिकारी को इस प्रकरण का निस्तारण 25 दिसंबर तक कराने को कहा है।