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कौशांबी को जल्द मिल सकता है नगर पालिका का दर्जा

Wed, 02 Nov 2016 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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 जिला बनने के बाद से कौशांबी में अब तक नगर पालिका नहीं थी। इसके लिए तमाम प्रयास किए गए। इसके बाद भी पहल नहीं हो रही थी। अचानक विधानसभा चुनाव के पहले मंझनपुर के साथ ही भरवारी नगर पंचायत को पालिका बनाने का प्रस्ताव भेजकर जिला प्रशासन से आपत्ति मांग ली गई है। इससे साफ हो गया है कि अब नगर पालिका परिषद का गठन होना तय है, लेकिन किसको भरवारी अथवा मंझनपुर को यह अभी तय नहीं हो सका है। इसका फैसला करने में अधिकारी जुट गए हैं। इस मामले में वह ग्राम पंचायतों से आपत्ति हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।  
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     इलाहाबाद के कभी अंग रहे दोआबा को 1997 में बसपा सरकार ने  कौशांबी जिला का दर्जा दिया था। इसके बाद से जिले की सात नगर पंचायतों में से किसी को अभी तक नगर पालिका परिषद का दर्जा नहीं मिला। पूर्व में मंत्री रहते हुए इंद्रजीत सरोज ने मंझनपुर नगर पंचायत को नगर पालिका परिषद का दर्जा दिलाने की कोशिश की थी, इसके लिए उन्होंने एड़ीचोटी का जोर लगाया था। वर्ष 2009 में मंझनपुर की सीमा में आने वाली 24 ग्राम पंचायतों से एनओसी मांगी थी। कई प्रधानों ने एनओसी नहीं दी थी। इससे यह मामला अधर में लटक गया था। इसके बाद दोबारा प्रस्ताव मांगा गया तो सभी प्रधान राजी हो गए थे।

यह प्रक्रिया चल ही रही थी कि भरवारी को नगर पालिका परिषद में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया। भरवारी नगर पालिका परिषद में 27 गांव शामिल किए गए हैं। हाल ही में सरकार ने मंझनपुर व भरवारी को नगर पालिका परिषद बनाने की मुहर लगाते हुए एडीएम से आपत्ति रिपोर्ट मांग ली। अब सारी जिम्मेदारी एडीएम पर आकर अटक  गई है कि वह किसको नगर पालिका परिषद का दर्जा दिलाते हैं। इसके लिए वह बाकायदा सर्वे भी करा रहे हैं। भरवारी नगर पालिका परिषद के सर्वे में शामिल 27 गांवों के प्रधानों से स्वीकृति पत्र भी मांगा गया है कि वह शामिल होना चाहते हैं अथवा नहीं।
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क्या होंगे फायदे
यदि मंझनपुर अथवा भरवारी को नगर पालिका परिषद का दर्जा मिलता है तो विकास कार्य तेजी से होंगे। इसके अलावा शहरीकरण भी होगा। सभी लिंक मार्ग नगर पालिका परिषद के कार्यालय से जोडे़ जाएंगे। इसके अलावा परिषद में आने वाले गांवों को पेयजल, बिजली, सड़क व सीवर लाइन की सुविधा दी जाएगी। यही कारण है कि जिले के अधिकारी भी चाहते हैं कि  भरवारी अथवा मंझनपुर को यह दर्जा मिले।

नेता ही अड़ाए हैं टांग
नगर पालिका परिषद का दर्जा तो मंझनपुर को बहुत पहले मिल गया होता, लेकिन स्थानीय नेताओं की वजह से यह अब तक संभव नहीं हो सका। क्षेत्रीय नेताओं को लगता है कि यदि वह पालिका में शामिल हो गए तो उनके हाथ से प्रधानी चली जाएगी। यही कारण रहा कि वह एनओसी देने में टालमटोल करते रहे। मंझनपुर का रास्ता तो साफ हो गया है, लेकिन अब भरवारी को इस कांटे को दूर करने में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

हफ्ता भर पहले उनसे आपत्ति मांगी गई है। लेखपालों की टीम सर्वे कर रही है। जांच के बाद ही वह अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। जिले में एक ही पालिका परिषद होगी। वह कौन होगी, अभी वह बता नहीं सकते हैं।
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श्रीकृष्ण यादव-एडीएम
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