नाग पंचमी का पर्व 29 जुलाई यानी मंगलवार को मनाया जाएगा। इस साल नाग पंचमी पर अद्भुत योग बन रहा है। इस दिन नाग देवता की पूजा करते हैं।
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तिथि पर नाग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है। हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस साल नाग पंचमी पर्व पर शिव वास योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही रवि योग और शिववास योग का संयोग बन रहा है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव कैलाश पर्वत में जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे।
पं. विनोद मिश्र ने बताया कि इस दिन नाग देवता, शिव की पूजा व रुद्राभिषेक करने वाले के जीवन से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है। इस दिन सर्प को स्नान कराने व उनकी पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन नाग देवता के आठ स्वरूपों (वासुकि, ऐरावत, मणिभद्र, कालिया, धनंजय, तक्षक, कर्कोटकस्य और धृतराष्ट्र) की पूजा की जाती है।
-
कब शुरू हुई नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की परंपरा
नागपंचमी को गुड़िया भी कहते हैं। इस दिन शाम को कपड़ों से बनी गुड़िया की डंडे से पिटाई की जाती है। इसके साथ ही महिलाएं गीत गाती हैं। कथा के अनुसार प्राचीन काल में महादेव नाम का युवक नाग देव का भक्त था। वह रोज शिवालय में भगवान शिव के साथ नाग देव की पूजा करता था।
नाग देव प्रतिदिन पूजा के दौरान महादेव के पैरों पर लिपट जाते थे। एक दिन महादेव की बहन ने नाग को लिपटा देख डंडे से नाग को पीट कर मार डाला। तभी से नागपंचमी के दिन प्रतीकात्मक सजा के तौर पर कपड़े से बनी गुड़िया को पीटने की परंपरा चली आ रही है।
-
दरवाजे पर गोबर से नाग की आकृति बनाने की परंपरा
नागपंचमी के दिन घरों के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाकर पूजा करने की परंपरा है। इससे कभी भी घर में नाग भय नहीं रहता है। सनातन धर्म में नाग देवता को जल और अन्न का देवता माना जाता है।
नाग पंचमी पर शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 28 जुलाई को देर रात 11: 43 बजे से शुरू होगी। वहीं, 30 जुलाई को देर रात 12:43 बजे पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इस प्रकार 29 जुलाई को नाग पंचमी मनाई जाएगी।