लोहकट गांव के राममिलन हत्याकांड की गुत्थी उलझती जा रही है। यमुना नदी की लहरों में समाए बेटे की लाश के साथ मां-बाप भी अचानक गुम हो गए हैं। परिजनों के साथ ही आरोपी चाचा का भी सुराग नहीं लग रहा है। मां-बाप के गायब होने से इस घटना में नया मोड़ आ गया है। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद कौशाम्बी थाने की पुलिस अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है कि आखिर दिवंगत के मां-बाप पुलिस का सामना करने से कतरा रहे हैं अथवा वह किसी दबाव में पुलिस से दूर भाग रहे हैं।
कौशाम्बी थाना क्षेत्र के लोहकट गांव के राम मिलन (17) की 28 जनवरी की रात घर के बाहर अलाव तापते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दो दिन तक पूरा गांव खामोश रहा। चौकीदार रामजी को इसका पता चलता है तो उसने गांव में सुरागसी के बाद कौशाम्बी थाने के इंस्पेक्टर को 31 जनवरी की देर शाम सूचना दी। इंस्पेक्टर संगम लाल मिश्र करीब सात बजे पहुंचे। राम मिलन की मां रामप्यारी व पिता अशोक से पूछताछ करने के बाद वह वापस आए और चौकीदार की तहरीर पर राम मिलन के चाचा रामबहादुर के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। गैर इरादतन हत्या व लाश छिपाने का मामला दर्ज किया गया। दूसरे दिन पुलिस ने यमुना में शव की खोजबीन कराई ,लेकिन शव नहीं मिला। इसके बाद पुलिस वापस लौट गई। साथ ही राम मिलन के मां-बाप भी गांव छोड़कर चले गए। चाचा ने ही हत्या के बाद शव को यमुना नदी में फेंका था, यह चौकीदार का आरोप है। पुलिस रामबहादुर को खोज रही है, ताकि शव मिल सके, लेकिन आरोपी का पता नहीं चल रहा है। इस मामले में सबसे गंभीर प्रश्न पुलिस के लिए यह है कि आखिर राम मिलन के माता-पिता उनका सहयोग करने के बजाय गायब क्यों हो गए। अभी तक पुलिस यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकी है कि रामबहादुर को राम मिलन के परिजन बचाना चाहते हैं या फिर किसी दबाव में वह गांव छोड़कर गायब हुए हैं। मृतक राम मिलन की मां रामप्यारी और अशोक भी अचानक कहां चले गए। कौशाम्बी थाने के इंस्पेक्टर संगम लाल मिश्र का कहना है कि जांच चल रही है। जल्द घटना का खुलासा हो जाएगा।