बहादुरपुर में मां व बेटी के अंतिम संस्कार के समय जुटी ग्रामीणों की भीड़। संवाद
कोतवाली के बहादुरपुर गांव में कच्चा मकान ढहने से मौत का शिकार हुई मां व बेटी के शव को एक ही गड्ढे में सोमवार दोपहर दफन किया गया। गमगीन माहौल में गृहस्वामी ने क्रियाकर्म किया। अंतिम संस्कार के दौरान पूरे गांव में मातम रहा। कई घरों में खान नहीं बना।
बहादुरपुर निवासी महाराजदीन कच्चे मकान में गुजर बसर करता था। रविवार को कई घंटे लगातार हुई बारिश के दौरान उसका मकान ढह गया था। मलबे में दबकर पत्नी प्रेमा देवी, बेटी साधना की मौत हो गई। जबकि छोटी बेटी अराधना देवी जख्मी हुई। महाराजदीन के बेटे शोभा लाल, भगवानदीन व बजरंगी दिल्ली में रहकर मजदूरी करते थे। लिहाजा उनके वापस लौटने के चक्कर में परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया।
सोमवार सुबह जब तीनों बेटे घर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद दोपहर करीब तीन बजे मां व बेटी का शव लेकर गांव आए। तब हल्की बारिश हो रही थी। बेटी और बेटे रोते-बिलखते रहे। गांव के बाहर महाराजदीन ने क्रिया कर्म के लिए पहले दो गड्ढे खोदवाए। तभी कुछ लोगों ने मां व बेटी को एक साथ दफन किए जाने की राय दी। नतीजतन अगल-बगल खोदे गए गड्ढों की मेड़ काट दी गई। दोनों के शव एक ही गड्ढे में दफन किए गए।