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मनरेगा: चार हजार प्रवासी कामगारों को मिला रोजगार

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MNREGA: Four thousand migrant workers got employment - फोटो : KAUSHAMBI
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मनरेगा: चार हजार प्रवासी कामगारों को मिला रोजगार
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338 ग्राम सभाओं में 28 हजार से ज्यादा श्रमिकों के लिए दो वक्त की रोटी का सहारा बनी मनरेगा
गांवों में जल संचयन और चकरोड निर्माण की 775 परियोजनाओं पर चल रहा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। दूसरे राज्यों से आने वालों कामगारों के लिए अब मनरेगा दो वक्त की रोटी का सहारा बन रही है। लॉकडाउन में घर आए तकरीबन चार हजार प्रवासी मजदूर योजना के तहत गांवों में ही काम कर रहे हैं। गांवों में जल संचयन, खेत समतलीकरण और चकरोड निर्माण सरीखे काम कर प्रवासी अपने परिवार का खर्च चला रहे हैं।
मजदूरों का पलायन रोकने के लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना लागू कर रखी है। योजना के तहत मजदूरों को गांव में ही सौ दिन का काम मुहैया कराने का प्रावधान है। बताया जाता है कि मजदूरों ने योजना के तहत अपना पंजीकरण तो करा लिया, लेकिन किसी कारण से कमाने के लिए वह दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा आदि राज्य चले गए। खुद सरकारी आंकड़े गवाह है कि जिले में मनरेगा से दो लाख तीन हजार 923 लोगों ने अपना जॉबकार्ड बनवा रखा है। इसके सापेक्ष पिछले साल महज 69 हजार 830 जॉब कार्डधारकों ने ही काम मांगा। बड़ी संख्या में मजदूरों ने योजना से दूरी बना रखी थी। अब कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन लागू किया तो बड़ी संख्या में प्रवासी गांव लौटने लगे। सरकारी मदद या खुद वाहन की व्यवस्था कर करीब 28 हजार लोग जिले में वापस आ चुके हैं। जिन लोगों ने क्वारंटीन की अवधि पूरी कर ली अब वह काम की तलाश को परेशान होने लगे। मनरेगा ही उन्हें खुद व परिवार के लिए दो रोटी का जुगाड़ करती दिखी। कौशांबी विकास खंड के म्योहर गांव में बभना तालाब की खुदाई का कार्य मनरेगा से कराया गया है। इस तालाब में करीब 255 मजदूर लगाए गए थे। इसमें 30 श्रमिक प्रवासी थे। इसी तरह गौहानी, पड़रिया सुकवारा, अर्का महावीरपुर गांव में भी प्रवासी श्रमिकों ने मनरेगा के तहत कराए जाने वाले काम में कार्य किया। आंकड़ों पर जाएं तो इन दिनों जिले की 388 ग्राम पंचायतों में जल संचयन, खेत समतलीकरण व चकरोड निर्माण आदि के 775 काम कराए जा रहे हैं। इनमें 28 हजार से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे हैं। श्रमिकों में चार हजार के आसपास प्रवासी हैं। बड़ी संख्या में अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिक काम पाने के लिए प्रधान और सेक्रेटरी के संपर्क में हैं।
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इनका कहना है
ग्राम सभाओं में मनरेगा के तहत जल संवर्धन व कच्चा निर्माण कराया जा रहा है। इन दिनों प्रवासी मजदूर भी काम की डिमांड कर रहे हैं। प्रधान और सेक्रेटरी से कहा गया है कि शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए कार्य कराएं।-लक्ष्मण प्रसाद, पीडी डीआरडीए
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