MLA Ramcharan Tiwari used to campaign with his supporters by bicycle
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वर्ष 1969 के पांचवें विधानसभा के दौरान संसाधनों का अभाव था। उस वक्त एसएसपी प्रत्याशी रामचरण तिवारी अपने समर्थकों संग साइकिल से क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने जाते थे। समर्थक अपने साथ खाने-पीने के लिए लाई चना साथ लेकर चलते थे।
आज से 52 साल पहले हुए पांचवें विधान सभा चुनाव के दौरान प्रचार की तरीका एकदम जुदा था। संसाधनों का घोर अभाव था। वर्ष 1974 में दारानगर निवासी रामचरण को सोशलिस्ट पार्टी ने सिराथू सीट से मैदान में उतारा।
रामचरण अपने समर्थक छोटेलाल यादव निवासी बाले का पुरवा, ननकू सिंह निवासी अलीपुरजीता, सिद्धार्थ सिंह गौतम निवासी कोरियों, रामऔतार शास्त्री निवासी केन के साथ साइकिल से क्षेत्र में प्रचार करने के लिए जाते थे।
ये सभी लोग भोर में घर से निकलने के बाद अंधेरा होने तक दारानगर लौट आते थे। रात में फिर खाने-पीने के बाद अगले दिन भ्रमण का कार्यक्रम तय होता था। इस तरह से अनवरत चुनाव प्रचार होता था। पार्टी की ओर से कमासिन और सैनी गुरुकुल में चुनावी सभा का भी आयोजन किया गया था। पार्टी के उस वक्त के कद्दावर नेता जनेश्वर मिश्र, सत्य प्रकाश मालवीय और सालिगराम जायसवाल की सभा होने के बाद सियासी माहौल सोशलिस्ट पार्टी के पक्ष में तब्दील हो गया।
कांग्रेस का अभेद्य किला ध्वस्त करने के लिए पार्टी ने भी पूरी ताकत लगा दी। तांगा में माइक लगाकर कार्यकर्ताओं की एक टीम अलग से चुनाव प्रचार करती थी। उस वक्त तांगा में माइक लगाकर प्रचार करने को हाईटेक माना जाता था।
दिवंगत विधायक राम चरण तिवारी के पुत्र मूलप्रकाश तिवारी बताते हैं कि उनके पिता विधायक होने के बाद सदन में हिस्सा लेने के लिए बस से लखनऊ जाते थे। वहां से लौटने पर रात को सैनी बस स्टेशन पर उतरकर चार किमी पैदल चलकर अपने घर दारानगर पहुंचते थे। यह क्रम पूरे पांच साल तक बना रहा।