धान की सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि किसानों की फसल कटकर घरों तक पहुंच चुकी है। सरकारी क्रय केंद्रों के न खुलने से बिचौलियों की बल्ले-बल्ले है। वह किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम दामों पर धान खरीद रहे हैं और प्रति क्विंटल तीन किलो तक की मनमानी कटौती भी कर रहे हैं।
खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए धान की सरकारी खरीद एक नवंबर से शुरू होनी है। इस बार सामान्य धान के लिए एमएसपी 2369 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान के लिए 2389 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। क्रय केंद्रों पर बिक्री के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
किसानों को आलू व सरसों की बोआई और बच्चों की पढ़ाई के लिए नकदी की जरूरत है। सरकारी खरीद में देरी के कारण उन्हें मजबूरी में बिचौलियों को 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक धान बेचना पड़ रहा है। बिचौलिये प्रति बोरी करीब सवा किलो और प्रति क्विंटल तीन किलो तक की कटौती कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि हर साल सरकार के भरोसे बैठते हैं लेकिन खरीद में देरी से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने खरीद जल्द शुरू करने की मांग की है।
किसान की फसल ही उसकी पूंजी है। जब समय से खरीद नहीं हो रही है तो मजबूरी में स्थानीय खरीदार को फसल बेचना पड़ रहा है इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है। ऐसा मजबूरी में करना पड़ रहा है। - बरमदीन, किसान
हर साल की यही कहानी है। जब छोटे किसान का धान बिक जाता है तो खरीद शुरू होती है। बड़े किसान और कारोबारी को ही सरकारी खरीद योजना का लाभ मिलता है। छोटा किसान कारोबारियों के शोषण का शिकार होता है।- शिवबरन सिंह, किसान
- जिले में धान की सरकारी खरीद एक नवंबर से शुरू हो जाएगी। सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एमएसपी से कम दाम पर या वजन में मनमानी करने वाले बिचौलियों के खिलाफ शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।- सुधांशु चौबे, डिप्टी आरएमओ
बरमदीन, किसान