बीआरसी कौशाम्बी की नाक के नीचे शासनादेश का खुला उल्लंघन हो रहा है। बीआरसी का ताला न खुलने से उनके मातहत भी स्कूल नहीं पहुंचते। भोजन के चक्कर में बच्चे रोज स्कूल जाते हैं पर देर तक ताला न खुलने पर वह भूखे लौट जाते हैं। शिक्षकों की मनमानी पर गांव के अभिभावकों समेत ग्राम प्रधान में खासी नाराजगी है।
बीआरसी कौशाम्बी के स्कूलों में मध्याह्न भोजन को लेकर जारी किए गए शासनादेश की धज्जियां उड़ रही हैं। स्कूलों की बात तो दूर बीआरसी भवन में भी ताला बंद रहता है। सूत्रों की माने तो एबीएसए अजीत सिंह गर्मी की छुट्टी में कार्यालय नहीं आते। इसका परिणाम यह है कि उनके दफ्तर की नाक के नीचे चल रहे प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों के शिक्षक स्कूल नहीं खोलते।
शनिवार को सुबह आठ बजे से दोपहर 11 बजे तक स्कूलों के ताले नहीं खुले तो इस बावत ग्रामीणों से जानकारी की गई। गांव के अशर्फीलाल, अल्प नारायन तिवारी, शंकर दयाल आदि ने बताया कि बीआरसी समेत गांव के एक भी प्राथमिक और जूनियर विद्यालय का ताला नहीं खुलता।
कभी-कभी भूखे बच्चे भोजन के चक्कर में स्कूल पहुंच जाते हैं लेकिन उन्हें खाली पेट वापस लौटना पड़ता है। ग्राम प्रधान उमेश उपाध्याय का तो यहां तक कहना है कि जब से स्कूल बंद हुए हैं एक दिन भी ताला नहीं खुला। मध्याह्न भोजन बनना तो दूर की बात है। बहरहाल जब बीआरसी रक्सराई की नाक के नीचे चल रहे स्कूलों के ताले नहीं खुले तो दूर दराज के स्कूलों की स्थिति क्या होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
शनिवार को सेकंड सटर्डे था। इसलिए दफ्तर बंद रखा गया है। स्कूल खोले गए हैं इसका मैसेज व्हाट्सअप पर मिला है। सोमवार की इसकी जांच कराई जाएगी। यदि स्कूल नहीं खुले रहें होंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
अजीत सिंह, एबीएसए कौशाम्बी