चहेतों को लाभ देने के लिए सीएमओ ने चोरी-छिपे टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई। ई-टेंडर न कराकर एक ऐसे अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया, जिसकी प्रतियां जिले में आती ही नहीं। सीडीओ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से जो ओपेन टेंडर कराया गया है, वह नियम विरुद्ध है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही इसमें कार्रवाई की जाएगी।
बताया जाता है कि सीएमओ के निर्देश पर लिपिक प्रभाशंकर ने 12 मई को फर्नीचर, स्टेशनरी, साज सज्जा और जननी सुरक्षा योजना के तहत मरीजों को खाना खिलाने आदि का टेंडर निकलवाया था। यह टेंडर ऐसे अखबार में प्रकाशित कराया गया, जिसकी प्रतियां जिले में आती ही नहीं है। इस अखबार को लोग केवल नाम से ही जानते हैं। आरोप है कि चहेतों को लाभ देने के लिए सीएमओ डॉ. एसके उपाध्याय ने ई-टेंडर नहीं कराया। ई-टेंडर कराया जाता तो सभी ठेकेदार ई-टेंडर डालते। बुधवार को ही टेंडर डाला जाना था। दोपहर बाद टेंडर खोला भी जाना था। इसी पत्रावली सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह को मिली तो उनका पारा चढ़ गया। सीडीओ ने सबसे पहले सीएमओ से यही सवाल दागा कि 17 मई को हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि अब सभी ठेके ई-टेंडर के माध्यम से होंगे। सीएमओ ने कोई जवाब नहीं दिया। इसकी जानकारी डीएम को भी दी गई है। डीएम ने भी मामले में जवाब तलब किया है। टेंडर प्रक्रिया की जांच शुरू करा दी गई है। सीडीओ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से जो ओपेन टेंडर कराया गया है, वह नियम विरुद्ध है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही इसमें कार्रवाई की जाएगी।