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बुद्ध को प्रणाम करने आए 14 हजार विदेशी

Fri, 07 Oct 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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बुद्ध
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बारा (कौशांबी)। गौतम बुद्ध की तपोस्थली में सुविधाएं नहीं है। न बैठने की जगह है, न ही पानी की व्यवस्था है। ये तो शांति दूत के प्रति विदेशी पर्यटकों का अगाध प्रेम है कि वह यहां खींचे चले आ रहे हैं। इस साल अब तक 14 हजार 859 विदेशी पर्यटक आ चुके हैं। पिछले साल का रिकार्ड जुलाई में टूट गया था। अनुमान है कि साल के आखिर तक पर्यटकों का आंकड़ा 15 हजार हो जाएगा। वर्ष 2009 के बाद से यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
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  बुद्धा सर्किट में कौशांबी के शामिल होते ही यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। तीन साल से लगातार संख्या में इजाफा हो रहा है। हालांकि वर्ष 2009 में यहां तीन हजार ही विदेशी पर्यटक आए थे, लेकिन इसके बाद से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। कम्बोडिया, आस्ट्रिेलिया, थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, तिब्बत, जापान से यहां पर्यटक आते हैं। ये विदेशी पर्यटक बौद्ध विहारों में रुकते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। वह घंटों ध्यान लगाते हैं। इसके बाद बुद्ध की धरती को नमन कर चले जाते हैं। विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी तो यहां सुविधा की मांग होने लगी। हाल के दिनों में राजनीतिक कारणों से कौशांबी का नाम चमका तो यहां पर लोगों की निगाह गड़ गई। तपोस्थली के विकास का खाका खींच लिया गया है। पर्यटन विभाग इसको लेकर सक्रिय होगा है।

राष्ट्रपति व पीएम को भेजा पत्र
बौद्ध विहार की देखरेख करने वाले टी विशुद्ध थेरो ने विदेश से आने वाले बौद्ध भिक्छुओं को सुविधा देने के लिए राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को 30 जून को पत्र लिखा था। उन्होंने मांग की थी तपोस्थली में पार्किंग, रास्ता, पानी की व्यवस्था, टूरिस्ट बंगला, सरकारी बस सेवा, हाइवे से तपोस्थली तक साइन बोर्ड लगाए जाएं। टी विशुद्ध थेरों की मांग पर भारत सरकार ने पहल शुरू कर दी है।
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बस पर चलाते हैं ईट-पत्थर
टी विशुद्ध थेरो कहते हैं कि विदेश से आने वाले पर्यटकों से यहां के लोग अभद्र व्यवहार करते हैं। बुधिष्टों का छाता, चप्पल, बैग आदि उठा लेते हैं। इसके अलावा उनकी बसों में बच्चे पथराव कर देते हैं। इससे वह आहत हैं। कहते हैं कि बुधिष्ट यहां पूजा-पाठ के लिए आते हैं, उनसे इस तरह की अभद्रता ठीक नहीं।
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तीन साल में कितने आए पर्यटक
0 2014 में 13 हजार 141
0 2015 में 14 हजार 431
0 2016 में अब तक 18 हजार 859
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