वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने किया था उद्घाटन
- अस्थायी तौर पर हो रहा संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिले में रोडवेज बसें अपर्याप्त है। निजी बसें बड़ा सहारा हैं। अभी अनिश्चय की स्थिति बनी हुई है। क्यों कि मंझनपुर (कौशाम्बी) डिपो की तरफ से 50 नई बसों की डिमांड तो भेजी गई, लेकिन हुआ क्या। इसका पता अफसरों को भी नहीं है।
डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने 2022 में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने से पहले मंझनपुर डिपो का उद्घघाटन किया था। लेकिन यहां स्थायी व्यवस्था आज तक न बन पाई। कौशाम्बी डिपो के संचालन के लिए जो 20 बसें दी गईं, वह पहले से ही लीडर रोड डिपो से संचालित थीं। इन्हीं बसों में लीडर रोड डिपो की जगह मंझनपुर लिखवा दिया गया।
विधानसभा चुनाव के बाद यहां के लिए न तो एआरएम की स्थायी नियुक्ति हुई और न किसी अन्य अधिकारी की। सारा काम आज भी लीडर रोड के कर्मचारी ही देख रहे हैं। करीब छह महीने पहले शासन ने हरिओम श्रीवास्तव को मंझनपुर डिपो का एआरएम नियुक्त किया। तैनाती के बाद उन्होंने किसी तरह अस्थायी तौर पर वर्कशॉप का संचालन कराया।
हर महीने विभागीय बैठक में कर्मचारियों व बसों का मुद्दा उठता है। लेकिन सारी कवायद फाइलों में दफन होकर रह जा रही है। मुसाफिर भी मजबूर हैं। रास्ते में अगर रोडवेज बस मिली तो सवार हो लिए नहीं तो प्राइवेट बस में ही बैठकर सफर कर रहे हैं। ऊनो गांव के आशीष मिश्रा व सरसवां के संदीप त्रिपाठी का कहना है कि जिले से होकर बांदा, चित्रकूट, राठ, चारबाग (लखनऊ) की बसें न गुजरे तो समस्या और भी विकराल होती।
इनसेट
डग्गामार ही सहारा
मंझनपुर। ओसा-महेवाघाट मार्ग से बैरागीपुर होते हुए पश्चिमशरीरा, बैगवां, चायल से लोग प्रयागराज को जाते हैं। इस मार्ग पर 22 प्राइवेट बसें संचालित होती है। पश्चिमशरीरा के बरुआ निवासी मुन्ना, राजेश, गढ़ी के सोनू खान का कहना है कि सुबह के वक्त दो बस कानपुर जाती हैं। प्रयागराज जाने के लिए सिर्फ डग्गामार बसें ही संचालित की जा रही हैं। संवाद
वर्जन
पिछली बैठक में 50 बसों की मांग की गई थी। मकसद था कि जिन क्षेत्रों से बसें नहीं चल रही, उन्हें सुविधा दी जा सके। इसकी सूचना लिखित तौर पर शासन को भेजी गई। किस कारण से बसें नहीं मिली हैं, इसे लेकर वरिष्ठ अफसरों से सलाह लेकर रिमांइडर भेजा जाएगा।
- हरिओम श्रीवास्तव, एआरएम