हे राष्ट्रपिता हमें माफ करना। तमाम सरकारी व गैर सरकारी कार्यक्रमों के बीच रविवार को आपकी विरासत खोजी गई तो वह गायब मिली। वह था आपका गांधी चबूतरा, जो हर न्याय पंचायत में बना था, जिसकी जगह सरकार ने नियत की थी। ये वही गांधी चबूतरा है, जहां पहले रामधुन के बाद लोगों की तमाम मसलाें पर पंचायत भी होती थी। अब इस पर अपनों का ही कब्जा है। जिले के एक-दो गांधी चबूतरों को छोड़ दें तो हर जगह भैंस, बकरियां जुगाली करती दिखती हैं। साफ-सफाई की जगह यहां गंदगी ही दिखती है। कब्जा करने वाले गांधी जयंती पर भी बेखबर थे। न तो यहां साफ-सफाई हुई, न ही किसी ने बापू के सम्मान में उनके चबूतरे में दो फूल चढ़ाए।
आजादी के बाद जिले की हर न्याय पंचायत में गांधी चबूतरा का निर्माण कराया गया था। जहां-जहां गांधी चबूतरे हैं, उनका राजस्व अभिलेखों में जिक्र है। 2 अक्तूबर को जिले के लोगों ने राष्ट्रपिता को याद किया। फूल-माला चढ़ाकर उनको श्रद्धांजलि भी दी। साथ ही उनके किए गए कार्यों को याद कर लोगों को उनकी राह पर चलने का संकल्प भी दिलाया। अधिकारी हो अथवा नेता। सबने यही किया। भाजपा नेताओं ने राष्ट्रपिता के सम्मान में झाड़ू लगाई तो कांग्रेसियों ने उन्हें अपना बताते हुए पार्टी कार्यालय में याद किया। इस दौरान किसी ने गांधी चबूतरा की सुध नहीं ली। सरसवां ब्लॉक में दस गांधी चबूतरे बने हैं। दानपुर महांवा में कांग्रेस नेता व इंदिरा गांधी के करीबी कहे जाने वाले द्वारिका प्रसाद उर्फ नेता जी गांधी चबूतरा पर ही बैठकर रामधुन गाते थे।
गांव के ही 60 वर्षीय बुजुर्ग रामसजीवन कहते हैं कि नेता जी जब तक जिंदा थे, वह हमेशा सत्य और अहिंसा का ही पाठ पढ़ाते रहे। वह हमेशा गांधी जी के वचनों को लोगों को याद दिलाते। किसी भी कार्य को पूरा कराने के लिए अहिंसा की राह पर चलने की वह सलाह देते थे। कभी उन्होंने यह नहीं कहा कि सड़क जाम करो, सरकारी काम बंद करा दो। नेता जी की मौत होते ही लोगों ने गांधी चबूतरा पर कब्जा कर लिया। अब वहां लोग भैंस व बकरियां बांधते हैं। कुआंडीह का गांधी चबूतरा सुरक्षित रह गया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि प्राइमरी विद्यालय की जब चहारदीवारी बनी तो इसे भी घेर लिया गया, लेकिन रविवार को यहां भी किसी ने फूल नहीं चढ़ाया।
कांग्रेसियों को भी याद नहीं गांधी चबूतरा
जिले में गांधी चबूतरा है, इसकी जानकारी कांग्रेसियों को है, लेकिन इनका विकास कैसे हो। इसको लेकर वह तनिक भी चिंतित नहीं है। न ही वह चबूतरों को कब्जा मुक्त कराने का तनिक भी प्रयास कर रहे हैं। दो अक्तूबर को कांग्रेेसियों ने गांधी जंयती तो मनाई, लेकिन गांधी चबूतरा की उन्होंने चर्चा तक नहीं की।
डीएम को भी नहीं मालूम कहां है गांधी चबूतरा
डीएम अखंड प्रताप सिंह से जब इस संबंध में पूछा गया कि जिले में बने गांधी चबूतरों पर अतिक्रमण हो गया है तो, उन्होंने इस पर अनभिज्ञता जाहिर की। उनका कहना था कि पहले वह यह पता लगाएं कि कहां-कहां गांधी चबूतरा है, इसके बाद वह कार्रवाई कराएंगे।