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Kaushambi News: मशीन तैयार पर डॉक्टर नहीं... एक साल से बंद है नवजात उपचार इकाई

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सरसंवा सीएचसी में एक वर्ष पहले स्थापित एनबीएसयू में धूल फांक रही हैं मशीनें। फोटो संवाद
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नवजात शिशुओं की के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरसंवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब एक वर्ष पहले नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित की गई थी। इस इकाई में ऑक्सीजन सपोर्ट, वार्मर समेत सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन शिशु रोग विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती नहीं होने से यूनिट बंद पड़ी है। इसका असर तिरहार क्षेत्र की करीब तीन लाख आबादी पर पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सीएचसी में 3803 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें 378 नवजातों में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं सामने आईं, जबकि 35 नवजात की मौत हो गई।
एनबीएसयू बंद होने के कारण समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन या सांस लेने में तकलीफ वाले शिशुओं को जिला अस्पताल या प्रयागराज रेफर करना पड़ता है। इससे उपचार में देरी के साथ परिजनों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
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क्षेत्र के ग्रामीण अवधेश कुमार, सुलोचना देवी, राकेश सिंह आदि लोगों का कहना है कि जब भवन और उपकरण पहले से उपलब्ध हैं तो केवल डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती नहीं होने से करोड़ों की सरकारी व्यवस्था बेकार पड़ी है। यदि यूनिट समय पर शुरू हो जाती तो कई नवजातों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिल सकता था।
सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि जिले में शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण यूनिट शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने दावा किया कि जुलाई के अंत तक डॉक्टर की तैनाती कर एनबीएसयू का संचालन शुरू करा दिया जाएगा।

सरसंवा सीएचसी में एक वर्ष पहले स्थापित एनबीएसयू में धूल फांक रही हैं मशीनें। फोटो संवाद

सरसंवा सीएचसी में एक वर्ष पहले स्थापित एनबीएसयू में धूल फांक रही हैं मशीनें। फोटो संवाद

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