मोदी...मोदी की गूंज में कौशाम्बी की तीनों सीटों पर बसपा व सपा-कांग्रेस गठबंधन के सारे तिलिस्म धराशायी हो गए। बीजेपी के आगे न तो किसी का समीकरण फिट बैठा , न ही कोई सूरमा अपने लिए वोटों का ध्रुवीकरण करा पाया। कमल पर हुई वोटों की बारिश बता रही है कि पीएम के मन की बात का असर उन पर मतदान के दिन तारी था। भाजपा की बयार में जातीय आंकड़ों का गठजोड़ धरातल में तो गया ही, बसपा की जान व रीढ़ माने जाने वाला कैडर वोट भी तितर-बितर हो गया।
बसपा दलित-मुस्लिम गठजोड़ के तहत चायल व सिराथू में मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। वहीं सपा ने अपने परंपरागत वोट व मुस्लिमों के भरोसे से तीनों सीट पर जीत का ख्वाब देखा था। शुरूआत में जातियों का यह समीकरण इनके हक में दिखा भी था। भाजपा के स्टार प्रचारकों ने धावा बोला तो सारी कवायद धरी की धरी रह गई। बसपा के लिए कौशाम्बी में सतीश चंद्र मिश्र के अलावा कोई दूसरा स्टार प्रचारक आया नहीं था। सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए अखिलेश यादव ने प्रचार किया था। भीड़ भी जुटी थी, लेकिन वह वोट में नहीं बदली। भाजपा के स्टार प्रचारक अंतिम दिन तक कौशाम्बी में बने रहे।
चुनाव में एक बार भाजपा हमलावर हुई तो उसने अपना आक्रामक रुख प्रचार के आखिरी वक्त तक नहीं बदला। इसका भी भाजपा को बहुत जबर्दस्त लाभ मिला। यही कारण था कि सपा-कांग्रेस गठबंधन व बसपा का न तो कोई समीकरण बन सका, न ही वोटों का ध्रुवीकरण हो सका। भाजपा ने हर उस कांटे को अपनी राह से भी चुनाव के दौरान दूर किया था जो उनको दर्द से सकता था। दलितों का वोट बटोरने के लिए एक रणनीति के तहत पिछडे़ व अगड़े उनसे संपर्क में रहे और भाजपा की नीतियाें का बखान कर बसपा के प्रभाव से उनको बाहर निकाला। जिले की तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा हो चुका है। भाजपा खेमे में जश्न का दौर चल है।