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भाजपा की सुनामी में ढह गया बसपा का किला

Sun, 12 Mar 2017 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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kaushambi
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भाजपा की सुनामी में बसपा का बसपा का अभेद किला ढह गया। सबसे ज्यादा अप्रत्याशित परिणाम मंझनपुर का रहा। चार बार के विधायक इंद्रजीत सरोज को भी मुंह की खानी पड़ी। हैरानगी यह भी है कि सिराथू व चायल में बसपा तीसरे स्थान पर चली गई। बसपा के इस शर्मनाक प्रदर्शन से नेताओं की बोलती बंद हो गई, वहीं सपाई भी निगाह चुराते दिखे। भाजपा ने तीनों सीटों पर चुनाव ही नहीं जीता, बल्कि सिराथू व चायल के बीजेपी प्रत्याशियों ने जीत का अंतर इतना रखा कि सपा व बसपा समर्थकों के होश उड़ गए। चायल से 40 हजार तो सिराथू से बीजेपी प्रत्याशी ने 26 हजार ज्यादा वोटों से जीत हासिल की।
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   19 साल से बसपा के कब्जे में रही कौशाम्बी में अब भगवा लहरा रहा है। अप्रत्याशित परिणाम आने से भाजपाई उत्साहित हैं। भाजपा प्रत्याशियों ने सिराथू व चायल सीट पर रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की है। चायल प्रत्याशी संजय गुप्ता ने 40 हजार 96 मतों से विजयश्री हासिल की है तो सिराथू के भाजपा प्रत्याशी शीतला प्रसाद पटेल 25 हजार 528 मतों से विजयी हुए हैं। मंझनपुर सीट पर सबकी निगाह थी। पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज इस सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। वह पांचवीं बार बसपा से चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें शिकस्त मिली। इंद्रजीत सरोज को भाजपा प्रत्याशी लाल बहादुर ने आखिरी दौर में चार हजार 298 मतों से हरा दिया।

हालांकि इस सीट पर कांटे का मुकाबला बसपा व भाजपा के बीच हुआ था। एक-एक बूथ पर दोनों के बीच एक वोट-वोट की मारामारी थी, आखिरी दौर में लालबहादुर ने रफ्तार पकड़ी और 19 साल बाद बसपा के हाथी को रौंदकर यहां कमल खिला दिया। इस परिणाम को लेकर बसपाई सबसे ज्यादा सकते में हैं। चायल व सिराथू में बसपा दूसरे स्थान की भी लड़ाई नहीं लड़ सकी। यहां बसपा तीसरे स्थान पर पहुंच गई। सपा के वाचस्पति ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन वोटों के बंटवारे ने उनको तीसरी बार विधायक नहीं बनने दिया। कमोवेश ऐसा ही कुछ चायल में रहा। सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी तलत अजीम भी वोटों का ध्रुवीकरण करने में कामयाब नहीं हो सके।
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